केंद्रीय आम बजट दिशाहीन, प्रतिगामी और आम आदमी विरोधी : गणेश गोदियाल
महंगाई–बेरोजगारी बढ़ाने वाला, उद्योगपतियों का पोषक बजट : प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
देहरादून, 1 फरवरी 2026।
उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय आम बजट को दिशाहीन, प्रतिगामी, विकास विरोधी, अपने उद्योगपति मित्रों का पोषक तथा आम आदमी के हितों के खिलाफ महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाने वाला बजट बताया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत आम बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट एक बार फिर आंकड़ों की बाजीगरी तक सीमित है। बजट देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने के बजाय उसे कमजोर करने वाला है तथा इसमें उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्यों और आम जनता की घोर उपेक्षा की गई है।
उन्होंने कहा कि बजट में ‘‘तीन कर्तव्य’’ के नाम पर नया जुमला उछाला गया है, जिसमें आर्थिक वृद्धि में तेजी, जन आकांक्षाओं की पूर्ति और ‘सबका साथ–सबका विकास’ जैसी कोरी बातें की गई हैं। सात उच्चगति रेल कॉरिडोर और 100 स्मार्ट सिटी विकसित करने जैसे दावे पूर्व के बजटों की तरह मात्र घोषणाएं बनकर रह गए हैं।
गणेश गोदियाल ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाएं और किसानों की आय बढ़ाने जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल रही है। किसानों और आम आदमी की आय बढ़ाने के नाम पर केवल खोखली घोषणाएं की गई हैं। बजट न तो नई दिशा देता है और न ही किसी ठोस परिवर्तन का संकेत करता है। प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए बजटीय आवंटन को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय बजट में महंगाई कम करने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। पिछले कई वर्षों से लगातार जुमलेबाजी और चहेते उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की नीति के कारण वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है। जहां एक ओर महंगाई से जनता त्रस्त है, वहीं देश का आम आदमी विदेशी कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा तो की गई है, लेकिन देश के मौजूदा हवाई अड्डों की बदहाल स्थिति सुधारने के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है। किसानों, गरीबों और आम आदमी की आय बढ़ाने के दावे केवल भाषणों तक सीमित हैं।
गणेश गोदियाल ने कहा कि इस बजट में गरीब, किसान, युवा और महिलाओं की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। मध्यम वर्ग पर सबसे बड़ा प्रहार किया गया है। 4 से 8 लाख आय वर्ग पर 5 प्रतिशत कर लगाकर नौकरीपेशा मध्यम वर्ग पर सीधा बोझ डाला गया है। आयकर स्लैब में दी गई मामूली राहत ऊंट के मुंह में जीरे समान है।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित राज्य होने के बावजूद उत्तराखण्ड के लिए केंद्रीय बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया। रेल और हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने तथा दैवीय आपदाओं से निपटने के लिए भी बजट पूरी तरह मौन है। कुल मिलाकर यह बजट अपने उद्योगपति मित्रों के हित साधने वाला और देश के आम आदमी को निराश करने वाला बजट है।
