देहरादून

चेतावनी: निजी फिटनेस सेंटरों की मनमानी से बढ़ रहा आक्रोश, हड़ताल की स्थिति बन सकती है

देहरादून में कॉमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच का जिम्मा निजी कंपनियों को दिए जाने के बाद वाहन स्वामियों और चालकों में गहरा असंतोष पनप रहा है। लालतप्पड़ जैसे दूरदराज क्षेत्रों में स्थापित एटीएस (ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर) तक वाहनों को ले जाने की मजबूरी, निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक वसूली और कथित मनमानी के चलते स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। यूनियनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो हड़ताल का रास्ता अपनाया जा सकता है।

मुख्य शिकायतें और गंभीर आरोप:

मनमानी फीस का बोझ: पहले जो फिटनेस कार्य करीब 4,000 रुपये में हो जाता था, अब वही 20–25 हजार रुपये तक पहुंच गया है। वाहन स्वामियों का आरोप है कि निजी सेंटर सरकारी दरों से कई गुना अधिक वसूली कर रहे हैं।
दूरदराज केंद्रों की समस्या: आशारोड़ी से केंद्र को लालतप्पड़-डोईवाला शिफ्ट करने के कारण चालकों को कई बार 150–180 किमी तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, साथ ही दोहरा टोल टैक्स भी देना पड़ रहा है।
भ्रष्टाचार के आरोप: यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि निजी कंपनियों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से चालकों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
पहाड़ी जिलों के लिए बढ़ी परेशानी: जोशीमठ, चमोली और उत्तरकाशी जैसे दूरस्थ इलाकों से आने वाले वाहन स्वामियों को फिटनेस के लिए देहरादून तक आना पड़ता है, जिससे उन्हें 7 से 10 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
व्यावहारिकता पर सवाल: पूरे उत्तराखंड में सिर्फ 7 एटीएस सेंटर संचालित होने से पहाड़ के निवासियों के लिए यह व्यवस्था बेहद असुविधाजनक साबित हो रही है।
वाहन स्वामियों और यूनियनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि निजीकरण की इस व्यवस्था पर जल्द पुनर्विचार कर सेंटरों को सुलभ स्थानों पर नहीं लाया गया, तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की स्थिति पैदा हो सकती है।

Uma Shankar Kukreti