Uttarakhand

भारत में बिना बीमारी के क्यों युवाओं की अचनाक हो रही है मौते, aiims और icmr की रिसर्च में बड़ा खुलासा

उत्तराखंड केसरी डॉट इन | स्वास्थ्य डेस्क
भारत में 20 से 40 वर्ष की उम्र के युवाओं की अचानक हो रही मौतें अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनती जा रही हैं। शादी समारोहों, खेल गतिविधियों या सामान्य दिनचर्या के दौरान युवाओं के अचानक गिरने के वायरल वीडियो ने समाज में डर और भ्रम दोनों बढ़ा दिए हैं। इन घटनाओं को अक्सर “अचानक कार्डियक अरेस्ट” से जोड़ा जा रहा है।
इसी चिंता को समझने के लिए AIIMS, नई दिल्ली ने एक अहम शोध किया है, जो Indian Journal of Medical Research में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन Indian Council of Medical Research (ICMR) की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है।
18 से 45 वर्ष के युवाओं में सबसे ज्यादा अचानक मौत
मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच किए गए 2,214 मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम के विश्लेषण में 180 मौतें (8.1%) ‘अचानक मृत्यु’ की श्रेणी में पाई गईं।


इनमें से 103 मौतें (57.2%) 18 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं की थीं। परिजनों के अनुसार, अधिकतर मृतक घटना से पहले तक पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दे रहे थे।
हृदय रोग बना युवाओं की अचानक मौत का सबसे बड़ा कारण
AIIMS की रिसर्च के अनुसार, 42.6% मामलों में मौत की वजह हृदय रोग रहा।
पोस्टमॉर्टम में कई युवाओं की हृदय धमनियों में 70% से अधिक ब्लॉकेज पाई गई।
सबसे ज्यादा प्रभावित धमनी लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग (LAD) रही, जिसे जानलेवा हार्ट अटैक से जोड़ा जाता है।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि अधिकांश युवाओं ने कभी हृदय जांच नहीं करवाई थी और न ही किसी प्रकार की हार्ट से जुड़ी दवा ली थी। इसका मतलब है कि दिल की गंभीर बीमारियां युवाओं में बिना किसी चेतावनी के चुपचाप बढ़ रही हैं।
हर पांचवीं मौत की वजह अब भी रहस्य

अध्ययन में 21.3% मामलों में पोस्टमॉर्टम के बाद भी मौत की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई।
इन्हें ‘नेगेटिव ऑटोप्सी’ कहा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में दिल की इलेक्ट्रिकल या रिदम डिसऑर्डर जिम्मेदार हो सकते हैं, जो सामान्य पोस्टमॉर्टम में पकड़ में नहीं आते।
इन परिस्थितियों में जेनेटिक जांच और परिवार के अन्य सदस्यों की स्क्रीनिंग को जरूरी बताया गया है।
सांस की बीमारियां और अन्य कारण
रिसर्च के अनुसार:
21.3% मौतें सांस से जुड़ी बीमारियों (निमोनिया, टीबी) के कारण
शराब के आदी लोगों में नींद के दौरान उल्टी से दम घुटने के मामले
महिलाओं में फटी हुई एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और गर्भाशय फटने जैसी स्थितियों से अचानक मौत
घर और यात्रा के दौरान हुईं ज्यादा मौतें
अध्ययन में सामने आया कि:
55% से अधिक मौतें घर पर
30% मौतें यात्रा के दौरान
40% मौतें रात या तड़के
परिजनों ने अचानक बेहोशी, सीने में दर्द, सांस फूलना और पेट दर्द जैसे लक्षण बताए। इससे साफ होता है कि युवाओं में हार्ट अटैक हमेशा पारंपरिक लक्षणों के साथ नहीं आता।
क्या कोविड वैक्सीन से जुड़ी हैं ये मौतें?
शोध में कोविड संक्रमण और टीकाकरण की स्थिति की भी जांच की गई।
AIIMS की रिसर्च में कोविड वैक्सीन या संक्रमण और अचानक मौतों के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन को लेकर फैली आशंकाएं वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
AIIMS का निष्कर्ष
AIIMS के मुताबिक, युवाओं की मौतें भले ही अचानक लगती हों, लेकिन अधिकांश मामलों में बीमारियां पहले से शरीर में मौजूद थीं, जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित हृदय जांच, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा परिवार स्तर पर स्क्रीनिंग ही ऐसी असमय मौतों को रोकने का सबसे प्रभावी रास्ता है।

 

 

Uma Shankar Kukreti