देहरादूनयमकेश्वर

यमकेश्वर! अतिवृष्टि से तहस नहस गांव देवराना का होगा विस्थापन, भूमि चयन की प्रक्रिया होगी जल्द।

यमकेश्वर : गत माह भारी अतिवृष्टि के कारण उत्तराखंड में कई स्थानों में भारी नुकसान हुआ है, जिसका आकलन सरकार अपने माध्यम से कर रही है,
सरकार ने प्रदेश में जिलाधिकारीयो को स्पष्ठ निर्देश जारी किए हुए की अपने अपने क्षेत्र में अति नुकसान वाले गाँवो की सर्वे रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करे।
जनपद के जिलाधिकारी श्री आशीष चौहान ने यमकेश्वर के अधिकतर गाँवो का स्थलीय निरीक्षण किया जिसमें देवराना गांव की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई और जल्दी इस गाँव की ज्योलीजिकल सर्वे कर शासन को देने की अपनी सहमति गांव वालो की दी थी।

जनपद में  07 से 09 अगस्त और 12 अगस्त को हुई भारी बरसात के कारण यमकेश्वर के देवराना गॉव में जगह जगह भूधसांव से लगभग 40 से ज्यादा परिवार प्रभावित हुए थे जिसमें कुछ परिवारों के मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गये थे।
भूधंसाव के बाद जियॉलॉजी विभाग द्वारा गॉव का निरीक्षण किया गया था, जिसकी रिपोर्ट प्रशासन को प्राप्त हो गयी है। उप जिलाधिकारी, यमकेश्वर के अनुसार जियॉलाजी विभाग से गॉव की रिपोर्ट प्रशासन को प्राप्त हो गयी है, उक्त रिपोर्ट के अनुरूप गॉव का विस्थापन किये जाने हेतु संस्तुति दी गयी है, जल्दी ही रिपोर्ट के अनुसार गॉव के विस्थापन करने हेतु भूमि का चयन किया जायेगा।

 भौगोलिक स्थिति के अनुसार देवराना गॉव  समुद्र तल से 1500 फिट की ऊंचाई पर स्थित है जिसके चारों ओर खाई नुमा दर्रे है।  जिससे पूरे गांव में चारों औऱ से जमीन में लंबी लंबी दरारें और जमीन नीचे की ओर धँसी हुई है। जिससे ग्रामीणों के मकानों में भारी भारी दरारें और मकानों के कोने कोने खुल गये हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल तो मौसम साफ हो गया है किंतु आसमान में बादल मंडराते ही मन मे दहशत शुरू हो जाती है। प्रशासन ने फिलहाल गॉव के प्रभावित परिवारों के लिए टेंट लगाये हैं, गांव के मिनी बाजार डांखाल से प्राईमरी स्कूल तक सड़क पर लंबी लंबी दरारें दूर दूर तक गयी हुई है, और जमीन लगभग 04-5 मीटर नीचे धंसी हुई हैं, जिस कारण सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से आगे के गॉव कांडेय, तिमल्याणी, गुण्डी, आवई माला, आदि गॉव के लोगों को वाहन नहीं जाने से आवाजाही प्रभावित हो गयी है। वर्तमान में प्रधामंत्री सड़क योजना विभाग द्वारा जेसीबी लगाई गयी है और मार्ग को सुचारू करने का कार्य गतिमान है, जल्दी ही आवाजाही शुरू हो जायेगी।

देवराना गॉव के छुलिंग तोक में गेंदनलाल डोबरियाल की पत्नी दीपा देवी का मकान सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, प्रभावित महिला अपना सामान  लेकर गंगा भोगपुर में अपने मायके में रह रही हैं। उनके रसोईघर और एक दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है, जबकि  तीनों कमरों और छत पर तमाम बड़ी बडी दरारें पड़ी हुई हैं। प्रभावित परिवार की महिला दीपा देवी का कहना है कि वर्तमान में तो वह फिलहाल अपने मायके में रह रही हॅू लेकिन भविष्य की चिंता हर रोज सता रही है।
वहीं बल्लाखोली तोक में  जगदीश प्रसाद कण्डवाल ,कृष्णकुमार कण्डवाल राजकुमार कण्डवाल, , बैसाखी देवी का मकान ऊपर और नीचे से भू धसावं होने के कारण मकान खतरे की जद में हैं। वृद्ध महिला बैसाखी देवी का कहना है कि भू धंसाव होने के कारण चारों तरफ के रास्ते बंद हो गये हैं। पानी लाने के लिए तक रास्ता नहीं है। उन्होनें कहा कि जब रात को आसमान में गर्जना या बारिश होती है ते रात को चिंता सताने लगती है। मकान के अगल बगल में दरारें आने से डर का माहौल बना हुआ है। वहीं कृष्णकांत कण्डवाल का कहना है कि उनके मकान के अंदर के कोने तक दोनों दीवारों के जोड़ खुल गये हैं, बाथरूम पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रखा है। उन्होनें कहा कि हमे घर में रहने में डर लग रहा है, साथ ही भूधंसाव होने के कारण रास्ते तक बंद हो गये हैं।
वहीं सुनील ग्वाड़ी और दिवराना तोक में महावीर देवरानी, नरेश देवरानी, शिवानंद देवरानी, संजय देवरानी आदि का मकान पर भी दरारें आयी हैं। सुनील ग्वाड़ी का परिवार रात्रि में टेंट में रहने के लिए मजबूर है। अब बरसात बंद हो गयी है, जिस कारण थोड़ा हालात सामान्य हैं। वहीं सडक के नीचे अमरदेव देवरानी का मकान भी काफी प्रभावित हुआ है।  जिलकंड तोक में विजय ग्वाड़ी और पम्माकोटि तोक में अमरदेव ग्वाड़ी, विमला देवी, मनोज कुमार आदि का मकान भी खतरे की जद मे है। वहीं कलावती देवी पत्नी श्रद्वांनद देवरानी का कहना है कि हमारे पास अन्य जगह मकान बनाने का विकल्प भी मौजूद नहीं है, यह जो मकान है, इस पर आयीं दरारों से मकान अब खतरे की जद में है। उन्होने कहा कि पूरे देवराना गॉव को यहॉ से अन्य जगह विस्थापित कर दिया जाना उचित होगा। इसी तरह ओम प्रकाश बड़ोला चंन्द्र प्रकाश बडोला एवं अन्य गॉव के मकानों में भी दरारें दिखाई दे रही हैं। आमधार तोक में गौरी सिंह  का कहना है कि वहॉ पर भी भू धसांव होने के कारण जमीन नीचे ध्ांस गयी है, जिससे ग्रामीणों में  हर वक्त चिंता बनी हुई है।

 वहीं ग्रामीण त्रिलोक सिंह नेगी का कहना है कि 2014 की आपदा में भी गॉव में दूर दराज क्षेत्रों में भूस्खलन हुआ था किंतु इस तरह से भूधंसाव नहीं हुआ हैं। वहीं पूर्व प्रधान वंशीधर देवरानी का कहना है कि फिलहाल तो बारिश रूक गयी हैं किंतु आने वाले बारिश के समय में क्या कुछ घटना घटित हो सकती है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गयी हैं। उन्होनें कहा कि जिस तरह से चारों ओर से भू धसांव हो रखे हैं, उसको देखते हुए लगता है कि गॉव का विस्थापन ही एकमात्र विकल्प है। वहीं माधवानंद कण्डवाल ने कहा कि उन्होनें  अपने जीवन काल में पहली बार इस तरह गॉव में आपदा और प्रभावित होता देखी है, उन्होने कहा कि भविष्य में हमारी भावी पीढी यहॉ कैसे रहेगी यह बहुत बड़ा सवाल सामने खड़ा हो गया है। वहीं ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि हम वही लोग हैं जो मजबूर हैं जो यहॉ निवास कर रहे हैं, अभी तक हम अपने घरों में जैसे भी थे सुरक्षित महसूस करते थे लेकिन अब हालात बदल गये हैं ,घर से बाहर कहीं भी जाने से डर लगता है।
वहीं प्राईमरी विद्यालय भी खतरे की जद में है, वर्तमान में वहॉ पर 15 नौनीहाल शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं पिछले दिनों हुई आपदा के कारण उनका शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लगा रहता है। वहीं गॉव में पेयजल लाईन भी प्रभावित हुई है फिलहाल व्यवस्था के तौर पर पानी की पाईप लाईन को जोड़ दिया गया है।

   वहीं ग्राम प्रधान पिंकी देवी का कहना है कि अभी तक जियॉलाजी विभाग द्वारा रिपोर्ट नहीं आयी है, जब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती है तब तक विस्थापन के संबंध में कुछ नहीं कहा जा सकता है, किंतु गॉव में जिस तरफ भूधसांव हुआ है उसको देखकर और वर्तमान हालात तो विस्थापन ही एकमात्र विकल्प हैं। वही पूर्व प्रधान मुकेश देवरानी ने कहा कि हम सभी को जियॉलाजी की रिपोर्ट का इंतजार है, उसके बाद ही आगे की कार्यवाही पर बात करना संभव होगा।

  वहीं उपजिलाधिकारी यमकेश्वर अनिल चान्याल से दूरभाष पर वार्ता हुई जिसमें उन्होनें बताया कि प्रशासनिक तौर पर जियॉलॉजी विभाग से रिपोर्ट प्राप्त हो गयी है, रिपोर्ट के अनुसार गॉव का विस्थापन किया जाना है, जिसके लिए भूमि का चयन किया जाना प्रस्तावित है। जल्दी ही भूमि चयन की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जायेगी।

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