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यमकेश्वर : ताछला में एक दिवसीय जड़ी-बूटी प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न, किसानों को औषधीय पौधों की खेती की दी जानकारी

उद्यान विभाग के अधिकारियों चंद्रवीर सिंह व डॉ. रेनू पांडे ने किसानों को दी महत्वपूर्ण जानकारी,

डॉ. आर.आर. कुकरेती ने बताए औषधीय पौधों के वैज्ञानिक कृषिकरण के तरीके

यमकेश्वर/पौड़ी गढ़वाल। विकासखंड यमकेश्वर के ग्राम सभा ताछला में जिला भेषज विकास इकाई (उद्यान विभाग), कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल के तत्वावधान में एक दिवसीय जड़ी-बूटी कृषिकरण प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। ग्राम प्रधान सोहन लाल अमोली के विशेष आग्रह पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों को जड़ी-बूटी की नवीनतम कृषि तकनीक, पौधों का रखरखाव, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन और औषधीय उपयोग के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में उद्यान विभाग के अधिकारी चंद्रवीर सिंह और डॉ. रेनू पांडे सहित विभागीय प्रतिनिधियों ने किसानों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती से जुड़ी जानकारी दी। वहीं आयुर्वेद एवं औषधीय वनस्पतियों के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले डॉ. आर.आर. कुकरेती ने किसानों को विभिन्न औषधीय पौधों की पहचान, वैज्ञानिक तरीके से कृषिकरण, पौधों के रखरखाव, उचित समय पर कटाई और पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया।
बंजर भूमि को औषधीय खेती से जोड़ने पर जोर
अपने संबोधन में डॉ. कुकरेती ने कहा कि ग्राम सभा ताछला में बड़ी मात्रा में भूमि वर्तमान में बंजर पड़ी है, जहां झाड़ियां उगने के कारण जंगली जानवरों की आवाजाही भी बढ़ गई है। यदि ऐसी भूमि पर औषधीय एवं सुगंधित पौधों का वैज्ञानिक तरीके से रोपण किया जाए तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां औषधीय पौधों की खेती के लिए अनुकूल हैं। किसानों को एरंड, अर्जुन, चंदन, नीम, तेजपात, हरड़, बहेड़ा, आंवला जैसे औषधीय पेड़ों के साथ-साथ अकरकरा, अश्वगंधा, गिलोय, एलोवेरा, शतावरी, लेमन ग्रास, जटामांसी, ब्राह्मी, हल्दी, अदरक, शंखपुष्पी और रतनजोत आदि की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
डॉ. कुकरेती ने ग्राम प्रधान सोहन लाल अमोली की पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसानों को जड़ी-बूटी कृषिकरण से जोड़ने का यह प्रयास क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
किसानों के सवालों का विशेषज्ञों ने दिया समाधान
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने जड़ी-बूटी की खेती, पौधों के रखरखाव, बाजार, उपयोग और उत्पादन से जुड़े विभिन्न सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे। विशेषज्ञों ने मौके पर ही किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा विभागीय योजनाओं और तकनीकी सहयोग की जानकारी भी दी।
कार्यक्रम में विनोद, नवीन वडोला, शुभम शर्मा, मिथिलेश्वर, प्रेम चंद बडोला, तेजपाल, वीरेंद्र पाल, मनोज कुमार, वीरेंद्र प्रसाद, रमेश चंद्र, सुरेंद्र दत्त, आशीष अमोली, राजेंद्र प्रसाद अमोली, प्रदीप बडोला, वेदप्रकाश सहित क्षेत्र के कई किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्राम प्रधान सोहन लाल अमोली ने उद्यान विभाग के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों का आभार जताते हुए कहा कि ग्राम सभा में जड़ी-बूटी कृषिकरण को बढ़ावा देने से किसानों को अपनी बंजर भूमि का बेहतर उपयोग करने और आय के नए साधन विकसित करने का अवसर मिलेगा।