ग्रीन-एजी (GEF-6) परियोजना के अंतर्गत WWF द्वारा कुनाऊ, यमकेश्वर में बैठक
VVPF गतिविधियों को प्रोत्साहन एवं ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में ठोस पहल
जलागम विभाग, उत्तराखंड
यमकेश्वर (पौड़ी गढ़वाल), 30 अक्टूबर 2025 —
जलागम विभाग, उत्तराखंड सरकार के अंतर्गत संचालित ग्रीन-एजी (GEF-6) परियोजना के तहत WWF इंडिया द्वारा राजाजी टाइगर रिजर्व के गौहरी रेंज, कुनाऊ (यमकेश्वर) में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता परियोजना निदेशक (GEF-6) श्रीमती कहकशां नसीम (IFS) ने की।

बैठक का उद्देश्य ग्रीन-एजी परियोजना के तहत वन संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता और सतत आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में WWF के सहयोग से चल रही गतिविधियों को आगे बढ़ाना था।
बैठक में WWF से श्री पंकज जोशी, वन क्षेत्राधिकारी श्री राजेश जोशी, डिप्टी रेंजर श्री कौठियाल, ग्रीन-एजी टीम से कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन मंजू चौहान एवं मदन लाल, EDC अध्यक्ष श्री प्रदीप रावत, VVPF लीडर श्री सुरेश पयाल, तथा स्थानीय ग्रामवासी उपस्थित रहे।
मुख्य चर्चाएं एवं उद्देश्य
WWF प्रतिनिधियों ने बताया कि EDC (इको-डेवलपमेंट कमेटी) और VVPF (विलेज वॉलंटियरी प्रोटेक्शन फोर्स) ग्रामीण समुदायों को वन संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन, वनाग्नि नियंत्रण और सतत आजीविका संवर्धन से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
WWF द्वारा इन समितियों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग एवं जागरूकता के माध्यम से सशक्त करने की योजना साझा की गई।
ग्रामीण सहभागिता
कुनाऊ ग्रामसभा के ग्रामीणों ने मधुमक्खी पालन, फूल उत्पादन, पॉलीहाउस खेती और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों में रुचि व्यक्त की। ग्रामीणों ने अनुरोध किया कि उन्हें विभागीय योजनाओं से प्रशिक्षण व वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जाए, जिससे आजीविका और पर्यावरणीय संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिले।
WWF की आगामी पहलें
WWF द्वारा ग्रीन-एजी परियोजना के तहत नेचर गाइड प्रशिक्षण, बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम, माइको-प्लान कार्यशाला, EDC प्रशिक्षण सत्र एवं फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट वर्कशॉप जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं में पर्यावरणीय चेतना और कौशल विकास को बढ़ाना है।
निष्कर्ष
बैठक में यह सहमति बनी कि ग्रीन-एजी (GEF-6) परियोजना, जलागम विभाग के नेतृत्व और WWF इंडिया के सहयोग से सामुदायिक संरक्षण तंत्र एवं हरित आजीविका को सशक्त बना रही है।
VVPF जैसी समितियों की सक्रिय भूमिका से ग्रामीण समुदाय न केवल वन संरक्षण में योगदान दे रहे हैं बल्कि स्थानीय आर्थिक सशक्तिकरण का भी उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।
यह पहल यमकेश्वर क्षेत्र को सतत विकास और हरित आजीविका का आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
