UPES में FoSTaC प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन — खाद्य सुरक्षा और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता पर ज़ोर
देहरादून, 4 नवंबर 2025
यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज़ (UPES), देहरादून के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आज भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के Food Safety Training and Certification (FoSTaC) कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों और फैकल्टी सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

यह प्रशिक्षण एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (AMS) के प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान किया गया, जो कि FSSAI के अधिकृत ट्रेनिंग पार्टनर हैं। उल्लेखनीय है कि UPES एक Eat Right Campus Certified शिक्षण संस्थान है, जो खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली के संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है।
“FoSTaC प्रशिक्षण सुरक्षित और सतत खाद्य प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है” – डॉ. पद्मा वेंकट
उद्घाटन सत्र में डॉ. पद्मा वेंकट, डीन, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, ने कहा कि FoSTaC प्रशिक्षण खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक अत्यंत आवश्यक पहल है, जो प्रतिभागियों को न केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करता है, बल्कि खाद्य स्वच्छता प्रथाओं और नियामकीय मानकों की गहन समझ भी विकसित करता है।
उन्होंने FSSAI और FDA के “Eat Right India” अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल समाज में संतुलित एवं सुरक्षित भोजन के चयन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में प्रभावी रही है।
FDA उप आयुक्त श्री गणेश कंडवाल ने खाद्य सुरक्षा को जनस्वास्थ्य से जोड़ा
मुख्य अतिथि श्री गणेश कंडवाल, उप आयुक्त, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA), उत्तराखंड ने अपने संबोधन में कहा कि आज खाद्य सुरक्षा केवल नियामक अनुपालन का विषय नहीं, बल्कि यह जनस्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू बन चुका है।
उन्होंने “Eat Right” की अवधारणा को अपनाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, स्वच्छ, स्थानीय और मौसमी भोजन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से ‘फूड सेफ्टी एंबेसडर’ बनकर समाज में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और केस स्टडीज़ पर केंद्रित सत्र
राष्ट्रीय प्रशिक्षक श्री प्रेम कुमार शर्मा ने खाद्य स्वच्छता, मिलावट की पहचान, प्रयोगशाला परीक्षण प्रक्रिया तथा खाद्य पदार्थों के संदूषण के कारणों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक अभ्यास, केस स्टडीज़ और संवादात्मक चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में खाद्य सुरक्षा उपायों को समझने का अवसर मिला।
कुल 50 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में भाग लिया, जिनमें फैकल्टी सदस्य प्रो. निधि चौहान, सीनियर प्रो. उत्कर्ष जैन, प्रो. श्वेता सूरी तथा प्रो. इमाना पाल भी शामिल थीं।
खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता
इस आयोजन का समन्वय डॉ. शिखा सक्सेना, डॉ. अभिषेक चन्द्रा (UPES) एवं श्री जे. सी. पांडे (AMS) द्वारा किया गया। कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों में खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता के व्यावहारिक पहलुओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि UPES की जनस्वास्थ्य और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ किया।
