आपदा में तेज़ फैसले, तेज़ राहत: जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की सक्रिय कार्यशैली बनी मिसाल
मुख्यमंत्री धामी की मॉनिटरिंग में मालदेवता-सौड़ा सरौली में युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण, सड़कें और कलिंगा नहर बहाल
देहरादून, 06 अगस्त। आपदा के समय प्रशासन की असली परीक्षा होती है और देहरादून में हालिया अतिवृष्टि के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर राहत एवं पुनर्निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय गति दिखाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सतत मॉनिटरिंग और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के प्रभावी नेतृत्व में मालदेवता, सौड़ा सरौली तथा आसपास के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्स्थापन कार्य युद्धस्तर पर संचालित किए गए।
भारी वर्षा से सड़कें, सुरक्षा दीवारें और कलिंगा नहर क्षतिग्रस्त होने के बाद जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसका परिणाम यह रहा कि बेहद कम समय में अधिकांश क्षतिग्रस्त मार्गों पर आवागमन बहाल कर दिया गया तथा सुरक्षा कार्यों को भी तेजी से पूरा किया गया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई और सिंचाई विभाग ने बेहतर समन्वय के साथ कार्य करते हुए क्षतिग्रस्त सड़कों, सुरक्षा दीवारों और कलिंगा नहर का पुनर्निर्माण लगभग पूरा कर लिया। नहर के पुनः चालू होने से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना शुरू हो गया है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।
लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन द्वारा संवेदनशील स्थलों की निगरानी भी लगातार जारी है। सुरक्षा दीवारों, सुरक्षात्मक जाल और नदी के चैनलाइजेशन कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
आपदा प्रबंधन में डॉ. आशीष चौहान की त्वरित निर्णय क्षमता, जमीनी निरीक्षण, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और परिणामोन्मुख कार्यशैली ने यह साबित किया है कि समय पर लिए गए निर्णय जनहानि और नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन की तत्परता की सराहना करते हुए राहत कार्यों को संतोषजनक बताया है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मानसून अवधि के दौरान सभी संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी जारी रहेगी और जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
