जिलाधिकारी की सूझबूझ से बचा एक परिवार – बुजुर्ग दंपति ने बेटे-बहू को बेदखल न करने का लिया निर्णय
देहरादून, 05 अक्टूबर 2025
खुड़बुड़ा निवासी 70 वर्षीय वृद्ध दंपति द्वारा अपने पुत्र और पुत्रवधू को घर से बेदखल करने के संबंध में जिलाधिकारी न्यायालय में भरण-पोषण अधिनियम के अंतर्गत वाद दायर किया गया था। बुजुर्ग दंपति का कहना था कि पुत्र व पुत्रवधू उन्हें प्रताड़ित करते हैं और वे अब उनके साथ नहीं रहना चाहते।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले की दो सुनवाइयों में ही दोनों पक्षों को संवेदनशीलता से सुना और समझाया। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की सबसे छोटी लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, जिसे टूटने से बचाना सभी का दायित्व है। उन्होंने बुजुर्ग दंपति से आग्रह किया कि वे अपने पुत्र, पुत्रवधू और तीन नाबालिग नातियों को बेदखल न करें तथा आपसी संवाद और सहयोग से जीवनयापन करें।
डीएम ने परिजनों को एक-दूसरे के कर्तव्य और जिम्मेदारियों का स्मरण कराते हुए कहा कि वृद्ध माता-पिता का सम्मान और देखभाल करना पुत्र और पुत्रवधू का नैतिक दायित्व है, वहीं वृद्ध माता-पिता को भी अपने बच्चों की परिस्थितियों और आर्थिक स्थिति को समझना चाहिए।
सविन बंसल ने निर्धन पुत्र व पुत्रवधू को अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया, वहीं बुजुर्ग दंपति से भी आग्रह किया कि वे इस अवस्था में अपने पुत्र परिवार का साथ न छोड़ें। दोनों पक्षों के बीच आपसी सुलह कराते हुए जिलाधिकारी ने परिवार को एकजुट रखने का प्रयास किया।
बुजुर्ग दंपति के चार पुत्र हैं — जिनमें से दो अलग परिवार सहित रहते हैं, एक पुत्र दिव्यांग है तथा चौथा पुत्र बंसी, जिसके विरुद्ध यह वाद दर्ज किया गया था, कपड़ों का छोटा व्यवसाय करता है। उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और उसके तीन नाबालिग बच्चे हैं।
डीएम ने कहा कि जिला प्रशासन दोनों पक्षों के बीच आपसी तालमेल और सौहार्द बनाए रखने की निगरानी करेगा तथा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या अधिकार अतिक्रमण की स्थिति में उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
डीएम सविन बंसल की संवेदनशीलता और मध्यस्थता से इस मामले में परिवार के विखंडन को रोका जा सका और बुजुर्ग दंपति तथा उनके पुत्र-परिवार के बीच आपसी समझ और सुलह स्थापित हुई।
