पैरालाईडिंग और बंजी जम्पिंग जैसे साहसिक खेलों से खुल सकते हैं, यमकेश्वर क्षेत्र में रोजगार के द्वार

पैरालाईडिंग और बंजी जम्पिंग जैसे साहसिक खेलों से खुल सकते हैं, यमकेश्वर क्षेत्र में रोजगार के द्वार।

आज की भागती दौड़ती जिंदगी और शहरों से उब चुके लोग अपने वीकेंड पर पहाड़ों की सैर करना अधिक पंसद कर रहे हैं, लेकिन अगर मनोरंजन के तौर पर उन्हें साहसिक खेलों में अपने कारनामे दिखाने का अवसर मिलते ही उसको भुनाने का हर संभव प्रयास करते हैं। आज के पर्यटक अपने पैकेज मे पूरी योजना बनाकर चलते हैं। अतः हमारे यमकेश्वर क्षेत्र में जहॉ एक तरफ गंगा घाटी से लगे सभी चट्टी जैसे, फूल चट्टी, गरूड चट्टी, मोहनचट्टी, बिजनी आदि क्षेत्रों में लोग रिजॉर्ट में आकर अपना वीकेण्ड का आनन्द लेकर जाते हैं, लेकिन इन जगहों पर यमकेश्वर के मूल निवासियों के एक दो जगह पर ही व्यवसाय होगें बाकि अन्य क्षेत्र के लोगें ने यहॉ पर भूमि क्रय करके या लीज पर लेकर अपने व्यवसाय को बढाया है। शिवपुरी या अन्य स्थलों पर पैरालाईडिंग या बंजी जंम्पिग जैसे साहसिक खेलों ने भी पर्यटकों को आकर्षित किया है।
इसी तरह से यमकेश्वर के अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में भी पैरालाईडिंग और बंजी जम्पिग जैसे साहसिक खेलों को व्यवसायिक रूप दिया जा सकता है। इसी तरह से मावगढ में पूर्व ब्लॉक प्रमुख यमकेश्वर श्री प्रशांत बडोनी ने इस क्षेत्र में कदम उठाया और आज वह मावगढ मेंं कुशल व्यवसायी के तौर उबर रहे हैं। श्री प्रशांत बडोनी ने 2017 के विधानसभा चुनाव लड़ने के उपरान्त राजनीति से दूरी बनायी और स्वरोजगार के साथ पर्यटन के क्षेत्र में अनूठा कार्य किया है। प्रशांत बडोनी ने ट्वीन वैली रिजॉर्ट के नाम से मावगढ के समीप ना सिर्फ पर्यटकों के लिए सुंदर स्वच्छ रिजॉर्ट खोला है, बल्कि वहॉ पर साहसिक खेलों के पंसदीदा पर्यटकों के लिए पैरालाईिंडंग, बंजी जम्पिंग एवं अन्य साहसिक खेलों की व्वस्था की है।
जहॉ पर ट्वीन वैली रिजॉर्ट खोला है, वहॉ से सामने मावगढ के मंदिर का विहंगम दृश्य स्वतः ही सबको अपनी ओर आकर्षित करता हे, सूर्योदय के समय और सूर्यास्त के समय आसमान की लालिमा सबको मनमोह लेती है। पर्यटकों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केन्द्र दूर पहाड़ी पर बर्फ के पहाड़, चमकते हैं तो बस लोग उनमें ही रम जाते हैं, सुंदर प्रकृति के गोद में बना यह रिजॉर्ट अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पर्यटकों की पंसदीदा जगह बनी हुई है। योगा और ध्यान करने वाले पर्यटक तो सूर्योदय के समय को किसी भी मौसम मे नही छोड़ते हैं।
इसी तरह से यमकेश्वर के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की पैरालाईडिंग, जैसे साहसिक खेलों से रोजगार के अवसर खुल सकते हैं। इसी तरह ट्रेंकीग, बर्ड वाचिंग, जैसे कार्य को अपने रूचि के अनुसार व्यवसाय में परिवर्तित किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए यमकेश्वर क्षेत्र काफी आकर्षित हो सकता है। राजाजी नेशनल पार्क, हरिद्वार, ऋषिकेश, लक्ष्मणझूला, कोटद्वार, नीलकंठ, मावगढ, जैसे नामी पयर्टक स्थलो से जोड़कर इस तरह के कार्यां में अपना निवेश किया जा सकता है। आज के समय में पर्यटकों के लिए महॅगे रिजॉर्ट बनवाने की आवश्यकता भी नहीं है, क्यांंकि सरकार की होमस्टे योजना से घर पर रहकर ही वर्ड वाचिंग, और ट्रेकिंग पर्यटकों को अपने आसपास के क्षेत्र या जंगलों में करवाया जा सकता है। त्याड़ो, ताल घाटी, मालन घाटी, सतेड़ी घाटी तो पैरालाईडिंग, के साथ वर्ड वाचिंग और ट्रेकिंग के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है।
यमकेश्वर में पर्यटन हब बनाने के लिए यमकेश्वर के जनप्रतिनिधयों को सोशल मीडिया में जनहित से दूर बेमतलब के कार्यक्रमों में शामिल होने की सेल्फी डालने से बजाय यमकेश्वर की गढ्ढों से सटी पड़ी, अधूरी निर्मित कच्ची सड़कों की फोटो डाले और उसके निर्माण के लिए अथक प्रयास कर उसके बाद सेल्फी डाले तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि विकास धरातल पर होना है सोशल मीडिया में नहीं। जब तक यमकेश्वर की सड़कों की दशा नहीं सुधरती है, तब तक हम पर्यटकों को हम ज्यादा नहीं लुभा सकते हैं, अतः इसके लिए सभी जन प्रतिनिधियों द्वारा प्रयास किया जाना आवश्यक हैं।

साभार :-हरीश कंडवाल जी युवा पत्रकार सामाजिक कार्यकर्ता उत्तराखंड ।

©®@ हरीश कंडवाल मनखी की कलम से।✒📝📝📝 16 नवम्बर 2019

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