कोरोना संकट : केदारनाथ के कपाट खुलने के बाद तीर्थयात्रियों की आवाजाही से गुलजार रहने वाली केदारघाटी वीरान पड़ी है !

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ऊखीमठ : भगवान केदारनाथ के कपाट खुलने के बाद हेलीकॉप्टर की उड़ने की आवाजों व तीर्थ यात्रियों की आवाजाही से गुलज़ार रहने वाली केदारघाटी लॉकडाऊन के कारण विरान पडी़ हुई है। रोजी रोटी का संकट खड़ा होने के साथ ही यहाँ जनमानस प्रकृति की मार झेलने को विवश हो गया है! लॉकडाऊन के कारण विरान पडी़ केदार घाटी में प्रतिदिन दोपहर बाद प्रकृति का विकराल रुप धारण करने से यहाँ के जनमानस की रातों की नींद व दिन चैन हाराम हो रखा है। दोपहर बाद आसमान में बादलों की भयानक आवाजों से हर प्राणी के मन में यही भय सता रहा है कि कहीं प्रकृति का रौद्र रुप कहीं फिर से न बरस पड़े ! विगत वर्षों की बात करे तो भगवान केदार नाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली के अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर से ऊखीमठ से हिमालय रवाना होते ही ऊखीमठ से लेकर केदार नाथ धाम तक हर वर्ग के ग्रामीणों , व्यापारियों व तीर्थ पुरोहितों में भारी उत्साह व उमंग बना रहता था। भगवान केदारनाथ के कपाट खुलते ही केदार घाटी के हर यात्रा पड़ावों पर तीर्थ यात्रियों की आवाजाही शुरू होने से रौनक बनी रहती थी। तीर्थ पुरोहित, होटल, लॉज स्वामी घोड़े खच्चर संचालक से लेकर मजदूर वर्ग का हर व्यक्ति अपने रोजी रोटी कमाने में जुट जाता था। हेलीकॉप्टर की उड़ानों व वाहनों की आवाजाही होने से सम्पूर्ण केदारघाटी में रौनक लौट आती थी मगर इस बार कोरोना वायरस के कारण लॉक डाऊन होने से केदारनाथ में तीर्थ यात्रियों की आवाजाही पर रोक लगने से सम्पूर्ण केदार घाटी के यात्रा पड़ावों पर विरानी छायी हुई है। लॉक डाऊन के कारण हाथ का व्यवसाय छीन जाने के साथ ही प्रकृति की दोहरी मार झेलने को भी विवश हो गया है! केदार घाटी में प्रतिदिन दोपहर का मिज़ाज बदलने से यहाँ के जनमानस की रातों की नींद उड़ गयी है! अधिकांश इलाकों में ओलावृष्टि होने से काश्तकारों की 60 प्रतिशत फसले बर्वाद होने से काश्तकारों के अरमानों पर पानी फिर गया है! आसमान में बादलों की भयानक आवाजों से यहाँ का हर प्राणी खौफजदा है। हर एक को यही भय सता रहा है कि कहीं प्रकृति का रौद्र रुप फिर से कहर न बरसा दे! कनिष्ठ प्रमुख शैलेन्द्र कोटवाल ने बताया कि लॉक डाऊन के कारण यहाँ के जनमानस के सन्मुख दो जून रोटी का संकट बना हुआ है तथा प्रकृति की दोहरी मार प व दिन चैन हाराम हो रखा है। दोपहर बाद आसमान में बादलों की भयानक आवाजों से हर प्राणी के मन में यही भय सता रहा है कि कहीं प्रकृति का रौद्र रुप कहीं फिर से न बरस पड़े ! विगत वर्षों की बात करे तो भगवान केदार नाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली के अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर से ऊखीमठ से हिमालय रवाना होते ही ऊखीमठ से लेकर केदार नाथ धाम तक हर वर्ग के ग्रामीणों , व्यापारियों व तीर्थ पुरोहितों में भारी उत्साह व उमंग बना रहता था। भगवान केदारनाथ के कपाट खुलते ही केदार घाटी के हर यात्रा पड़ावों पर तीर्थ यात्रियों की आवाजाही शुरू होने से रौनक बनी रहती थी। तीर्थ पुरोहित, होटल, लॉज स्वामी घोड़े खच्चर संचालक से लेकर मजदूर वर्ग का हर व्यक्ति अपने रोजी रोटी कमाने में जुट जाता था। हेलीकॉप्टर की उड़ानों व वाहनों की आवाजाही होने से सम्पूर्ण केदारघाटी में रौनक लौट आती थी मगर इस बार कोरोना वायरस के कारण लॉक डाऊन होने से केदारनाथ में तीर्थ यात्रियों की आवाजाही पर रोक लगने से सम्पूर्ण केदार घाटी के यात्रा पड़ावों पर विरानी छायी हुई है। लॉक डाऊन के कारण हाथ का व्यवसाय छीन जाने के साथ ही प्रकृति की दोहरी मार झेलने को भी विवश हो गया है! केदार घाटी में प्रतिदिन दोपहर का मिज़ाज बदलने से यहाँ के जनमानस की रातों की नींद उड़ गयी है! अधिकांश इलाकों में ओलावृष्टि होने से काश्तकारों की 60 प्रतिशत फसले बर्वाद होने से काश्तकारों के अरमानों पर पानी फिर गया है! आसमान में बादलों की भयानक आवाजों से यहाँ का हर प्राणी खौफजदा है। हर एक को यही भय सता रहा है कि कहीं प्रकृति का रौद्र रुप फिर से कहर न बरसा दे! कनिष्ठ प्रमुख शैलेन्द्र कोटवाल ने बताया कि लॉक डाऊन के कारण यहाँ के जनमानस के सन्मुख दो जून रोटी का संकट बना हुआ है तथा प्रकृति की दोहरी मार प मार झेलने को विवश हो गया है! लॉकडाऊन के कारण विरान पडी़ केदार घाटी में प्रतिदिन दोपहर बाद प्रकृति का विकराल रुप धारण करने से यहाँ के जनमानस की रातों की नींद व दिन चैन हाराम हो रखा है। दोपहर बाद आसमान में बादलों की भयानक आवाजों से हर प्राणी के मन में यही भय सता रहा है कि कहीं प्रकृति का रौद्र रुप कहीं फिर से न बरस पड़े   विगत वर्षों की बात करे तो भगवान केदार नाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली के अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर से ऊखीमठ से हिमालय रवाना होते ही ऊखीमठ से लेकर केदार नाथ धाम तक हर वर्ग के ग्रामीणों , व्यापारियों व तीर्थ पुरोहितों में भारी उत्साह व उमंग बना रहता था। भगवान केदारनाथ के कपाट खुलते ही केदार घाटी के हर यात्रा पड़ावों पर तीर्थ यात्रियों की आवाजाही शुरू होने से रौनक बनी रहती थी।  तीर्थ पुरोहित, होटल, लॉज स्वामी घोड़े खच्चर संचालक से लेकर मजदूर वर्ग का हर व्यक्ति अपने रोजी रोटी कमाने में जुट जाता था। हेलीकॉप्टर की उड़ानों व वाहनों की आवाजाही होने से सम्पूर्ण केदारघाटी में रौनक लौट आती थी मगर इस बार कोरोना वायरस के कारण लॉक डाऊन होने से केदारनाथ में तीर्थ यात्रियों की आवाजाही पर रोक लगने से सम्पूर्ण केदार घाटी के यात्रा पड़ावों पर विरानी  छायी हुई है। लॉक डाऊन के कारण हाथ का व्यवसाय छीन जाने के साथ ही प्रकृति की दोहरी मार झेलने को भी विवश हो गया है! केदार घाटी में प्रतिदिन दोपहर का मिज़ाज बदलने से यहाँ के जनमानस की रातों की नींद उड़ गयी है! अधिकांश इलाकों में ओलावृष्टि होने से काश्तकारों की 60 प्रतिशत फसले बर्वाद होने से काश्तकारों के अरमानों पर पानी फिर गया है! आसमान में बादलों की भयानक आवाजों से यहाँ का हर प्राणी खौफजदा है। हर एक को यही भय सता रहा है कि कहीं प्रकृति का रौद्र रुप फिर से कहर न बरसा दे! कनिष्ठ प्रमुख शैलेन्द्र कोटवाल ने बताया कि लॉक डाऊन के कारण यहाँ के जनमानस के सन्मुख दो जून रोटी का संकट बना हुआ है तथा प्रकृति की दोहरी मार पड रही है।

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