धीरेंद्र प्रताप ने राज्य आंदोलनकारियों से की कोरोना से मुकाबले के लिए राज्य सरकार की उदारता पूर्वक सहयोग की अपील ।अपने अपने गांव लौट रहे प्रवासियों के सहयोग के लिए भी किया अनुरोध

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अपील

प्रिय साथियों
हमारे उत्तरकाशी जनपद की रवाई-यमुना घाटी के अनेकों साथियों ने राज्य में फैले कोरोना के दृष्टिगत राज्य सरकार की सहायता का फैसला किया है। मैं उनके फैसले का स्वागत करता हूं और राज्य के जो अन्य 12 जिले हैं वहां के लोगों से भी निवेदन करना चाहता हूं कि आज समय है कि हम दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राज्य सरकार की सहायता करें। हमारी राज्य सरकार से सदैव अपेक्षाएं रहती हैं लेकिन यह वक्त राज्य को बचाने का है ।लोगों के जीवन को बचाना है तो मैं जिन लोगों ने सहयोग किया उनका आभारी हूं ।उनमें से बहुत सारे लोग जो अभी बचे हैं वे भी आगे आ रहे हैं। रवांई घाटी के लोगों ने हम सब लोगों के लिए प्रेरणा की मिसाल कायम की है। राज्य भर में 15000 से ज्यादा हमारे चिन्हित भाई हैं। और वह सभी लोग सहायता करने की स्थिति में है ।जो लोग स्थिति में नहीं है वह अगर सहायता ना कर सके तो कोई बात नहीं ।लेकिन अन्य लोगों से मेरी अपील है कि कम से कम पहले तो 1 महीने की अपनी पेंशन और नहीं तो कम से कम ₹1000 का जरूर राज्य सरकार के कोष में सहायता देने की कोशिश करें तो यह राज्य की एक सच्ची सेवा होगी ।और आंदोलनकारियों का यह संदेश भी जाएगा कि हम उत्तराखंड में जिस राज्य को हमने अपने खून, पसीने को बहाकर बनाया है बसाया है उसको बचाएंगे भी। जो लोग भी राज्य में देश के अन्य हिस्सों से आ रहे हैं वह हमारे अपने भाई बहन और बेटे बेटियां हैं ।मेरी यह भी अपील है कि कहीं भी उनके साथ कोई दुरव्यवहार ना हो और यदि कोई दुरव्यवहार करें तो जो भी
आंदोलनकारी जहां पर मौजूद हैं वह अपने प्रवासी भाई की मदद के लिए आगे आए। अगर उन लोगों को खाने पीने में भी कोई दिक्कत हो उसमें भी आपअगर मदद करें तो मैं समझता हूं कि यह एक अपने प्रदेश की और देश की और अपने गांव की सच्ची सेवा होगी। मुझे उम्मीद है कि आप लोग बढ़-चढ़कर इस वक्त आपदा के दौर में राज्य सरकार का सहयोग करेंगे।

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