*बिथ्याणी में ज्ञान की त्रिवेणी: NEP 2020 और कौशल विकास पर AMU के साथ मंथन*
महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी में आयोजित उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित कार्यक्रम के द्वितीय दिवस की विस्तृत रिपोर्ट
बिथ्याणी (पौड़ी गढ़वाल)।
उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन और युवाओं में कौशल विकास की महत्ता को रेखांकित करने के उद्देश्य से महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी तथा देश के प्रतिष्ठित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दूसरे दिन ज्ञान, विमर्श और अकादमिक मंथन की त्रिवेणी बही। समसामयिक और प्रासंगिक विषयों पर केंद्रित इस कार्यक्रम के द्वितीय दिवस में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने प्रतिभाग किया।
भव्य शुरुआत और अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम के दूसरे दिन की औपचारिक शुरुआत मुख्य संयोजक डॉ. उमेश त्यागी के संबोधन के साथ हुई। उन्होंने सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए दोनों संस्थानों के इस साझा प्रयास को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बताया। डॉ. त्यागी ने कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आदान-प्रदान से न केवल प्राध्यापकों के दृष्टिकोण में व्यापकता आती है, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी वैश्विक मानकों के अनुरूप सीखने का अवसर मिलता है।
इसके पश्चात, महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय के माननीय प्राचार्य जी ने अपने स्वागत उद्बोधन से कार्यक्रम को गति दी। उन्होंने देश के विभिन्न अंचलों से आए मुख्य वक्ताओं, शिक्षाविदों और प्रतिभागी प्राध्यापकों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। प्राचार्य जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसी ऐतिहासिक संस्था के साथ मिलकर इस प्रकार के गंभीर विषयों पर चर्चा आयोजित करना गौरव की बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दो दिनों का यह बौद्धिक विमर्श आने वाले समय में उच्च शिक्षा की दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा।
आज दिनांक 20/05/2026 के द्वितीय दिवस के
प्रथम सत्र: कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा (Skill Development & Vocational Education)
कार्यक्रम का प्रथम तकनीकी सत्र पूरी तरह से कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा पर केंद्रित रहा।
मुख्य वक्ता: प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी, कार्यक्रम निदेशक, UGC-MMTTC, कुमाऊँ विश्वविद्यालय।
सत्र अध्यक्ष: डॉ. गिरिराज सिंह, महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी।
धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks): डॉ. राजीव सक्सेना, राजकीय महाविद्यालय, बनबसा।
प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी का मुख्य व्याख्यान
प्रथम सत्र की मुख्य वक्ता प्रो. दिव्या उपाध्याय जोशी ने ‘Skill Development & Vocational Education’ (कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा) विषय पर बेहद सारगर्भित और व्यावहारिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्तमान समय में केवल डिग्री आधारित शिक्षा की सीमाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के वैश्विक बाजार में ‘डिग्री के साथ-साथ हुनर (Skill)’ का होना अनिवार्य हो चुका है।
प्रो. जोशी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हवाला देते हुए बताया कि कैसे स्कूल और कॉलेज स्तर से ही व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का खाका तैयार किया गया है। उन्होंने उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों के संदर्भ में बात करते हुए कहा कि स्थानीय संसाधनों, पर्यटन, जैविक खेती और हस्तशिल्प से जुड़े कौशल विकास पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देकर हम न केवल पलायन रोक सकते हैं, बल्कि युवाओं को ‘रोजगार मांगने वाले’ के बजाय ‘रोजगार देने वाला’ (Entrepreneur) बना सकते हैं।
अध्यक्षीय टिप्पणी एवं धन्यवाद
इस सत्र की अध्यक्षता कर रहे महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय के डॉ. गिरिराज सिंह ने प्रो. जोशी के वक्तव्य की सराहना करते हुए कहा कि कौशल विकास को किताबी ज्ञान से निकालकर धरातल पर उतारने की आवश्यकता है। सत्र के अंत में राजकीय महाविद्यालय, बनबसा से आए डॉ. राजीव सक्सेना ने ‘बोर्ड ऑफ थैंक्स’ (धन्यवाद ज्ञापन) प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता के विचारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सत्र को बेहद ज्ञानवर्धक बताया।
द्वितीय सत्र: भारत में उच्च शिक्षा और एनईपी 2020 (Higher Education in India: NEP 2020)
भोजन अवकाश के पश्चात द्वितीय तकनीकी सत्र का आगाज़ हुआ, जो कि वर्तमान भारतीय शिक्षा व्यवस्था के सबसे बड़े बदलाव यानी ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ पर केंद्रित था।
मुख्य वक्ता: प्रो. सी. पी. एस. चौहान, पूर्व अध्यक्ष, शिक्षा विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU)।
सत्र अध्यक्ष: डॉ. राम सिंह सामंत, महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय, बिथ्याणी।
धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks): डॉ. नीतू तिवारी, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना।
प्रो. सी. पी. एस. चौहान का मुख्य व्याख्यान
द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सी. पी. एस. चौहान ने शिरकत की। शिक्षा शास्त्र के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रो. चौहान का विषय ‘Higher Education in India: NEP 2020’ था। उन्होंने भारतीय उच्च शिक्षा के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और एनईपी 2020 के माध्यम से आने वाले क्रांतिकारी बदलावों का एक व्यापक तुलनात्मक खाका पेश किया।
प्रो. चौहान ने अपने व्याख्यान में कहा कि NEP 2020 भारत की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का एक साहसिक प्रयास है। उन्होंने ‘मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट सिस्टम’ (Multiple Entry and Exit System), आरम्भ से आज शिक्षा के विकास का खाका रखा कि किस प्रकार तक्षशिला विश्वविद्यालय, नालन्दा विश्वविद्यालय, विक्रमशिला विश्वविद्यालय से शुरू होकर आक्रमणकारियों से होते हुए ब्रिटिश सरकार के शिक्षा के प्रयास और कितने ही शिक्षा आयोगों का सफर भारतीय शिक्षा ने यहां तक किया है।
और बहुविषयक दृष्टिकोण (Multidisciplinary Approach) जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने चेताया भी कि इस नीति की सफलता इसके बेहतर क्रियान्वयन और बुनियादी ढांचे के विकास पर निर्भर करती है। शिक्षकों को खुद को लगातार अपग्रेड करना होगा ताकि वे इस नीति के उद्देश्यों को पूरा कर सकें।
अध्यक्षीय टिप्पणी एवं धन्यवाद
सत्र की अध्यक्षता कर रहे बिथ्याणी महाविद्यालय के डॉ. राम सिंह सामंत ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि एनईपी 2020 को पूरी तरह से लागू करने में शिक्षकों और अकादमिक प्रशासकों की भूमिका मार्गदर्शक की होगी। इस सत्र का औपचारिक अंत पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना से आईं डॉ. नीतू तिवारी द्वारा प्रस्तुत ‘बोर्ड ऑफ थैंक्स’ के साथ हुआ। उन्होंने प्रो. चौहान के गहन विश्लेषण के लिए उनका आभार व्यक्त किया और दूर-दराज से आए विद्वानों की सहभागिता को सराहा।
