एमडीडीए में संविधान दिवस पर उद्देशिका का सामूहिक पठन, राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को दोहराया
देहरादून / 26 नवंबर 2025
“संविधान की मूल भावना ही एमडीडीए की कार्यसंस्कृति का आधार” — उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी
संविधान दिवस के अवसर पर बुधवार को मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने की। इस दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भारतीय संविधान की उद्देशिका का सामूहिक पठन किया और न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की।

एमडीडीए परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में सभी शाखाओं के अधिकारी और कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रनिर्माण की दिशा में मिलकर कार्य करने के संकल्प के साथ हुआ।
सचिव मोहन सिंह बर्निया का संदेश
सचिव मोहन सिंह बर्निया ने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों को संविधान दिवस एवं विधि दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा—
“26 नवम्बर 1949 का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। इसी दिन संविधान सभा ने भारतीय संविधान को स्वीकार कर लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी।”
उन्होंने संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय संविधान विश्व का सबसे विस्तृत, समावेशी और समानता प्रदान करने वाला संविधान है। उन्होंने कहा—
“संविधान राष्ट्र के विकास, प्रगति और सुशासन की आधारशिला है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यों को व्यवहार में उतारे।”
सचिव बर्निया ने आगे कहा कि एमडीडीए में सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास कार्यों के हर पहलू में संविधान की भावना को सर्वोपरि रखा जाता है। प्राधिकरण समर्पित प्रयासों के साथ सुव्यवस्थित नगर नियोजन और बेहतर शहरी प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने अपने संदेश में कहा—
“भारतीय संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा है, जो हमें अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाना सिखाता है। संविधान दिवस मात्र एक औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का पुनः स्मरण है।”
उन्होंने कहा कि एमडीडीए में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और जनसेवा की भावना को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक विकास कार्य में संविधान की मूल भावना को आत्मसात किया जा रहा है।
“विकास तभी सार्थक है जब वह न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित हो। एमडीडीए यही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
