Uttarakhand

स्टोन फ्रूट उत्पादन में पहाड़ की बागवानी का भविष्य, इसे मिशन बनाने की जरूरत

हरेला गाँव-धाद के “आड़ू, प्लम, खुमानी की बात” कार्यक्रम में दून लाइब्रेरी में हुआ विमर्श

देहरादून। उत्तराखंड हिमालय में स्टोन फ्रूट्स—आड़ू, प्लम और खुमानी—की बागवानी भविष्य की बड़ी आर्थिक संभावना बन सकती है। इसे अब मिशन मोड पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। यह बात दून लाइब्रेरी में आयोजित “हरेला गाँव-धाद की आड़ू, प्लम, खुमानी की बात” विषयक विमर्श में प्रमुख रूप से सामने आई। कार्यक्रम के दौरान स्टोन फ्रूट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक मांगपत्र भी जारी किया गया।
कार्यक्रम का विचार पक्ष रखते हुए नीलेश नेगी ने कहा कि वर्ष 2025 में स्टोन फ्रूट्स को लेकर एक माह तक चली सघन गतिविधियों के बाद धाद संस्था इस पहल को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि स्टोन फ्रूट माह का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित नहीं, बल्कि किसानों, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर ठोस संवाद स्थापित करना है, ताकि जरूरी सुझावों और सवालों की ओर शासन और समाज का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
मुख्य वक्ता एवं उद्यान विशेषज्ञ कुंदन सिंह पंवार ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने बागवानी की शुरुआत सेब उत्पादन से की थी, लेकिन पहाड़ की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने स्टोन फ्रूट्स की विभिन्न प्रजातियों की ओर रुख किया। उन्होंने बताया कि यात्रा सीजन के दौरान इन फलों को अच्छा बाजार मिल रहा है और इससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।
कृषक बागवान संगठन के अध्यक्ष बीरबान सिंह ने कहा कि लंबे समय तक सेब उत्पादन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में कार्य करने के बाद अब उन्होंने भी स्टोन फ्रूट्स की संभावनाओं को देखते हुए इस दिशा में काम शुरू किया है।
उद्यान विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. खुकसाल ने कहा कि स्टोन फ्रूट्स के उत्पादन में अपेक्षाकृत कम कीटनाशक और पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही इनका उत्पादन उस समय होता है जब उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार उपलब्ध हो सकता है।
सभा में विशेषज्ञों और आम नागरिकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मांगपत्र का वाचन आशुतोष शर्मा ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकेश नवानी ने की। उन्होंने कहा कि धाद संस्था लगातार किसानों से जुड़े मुद्दों को शासन और समाज तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। कार्यक्रम का संचालन हिमांशु आहूजा ने किया।
इस अवसर पर आलोक सरीन, ज्ञान प्रकाश गुप्ता, जयपाल सिंह बिष्ट, बृजमोहन उनियाल, उपेंद्र सिंह रावत, प्रदीप डिमरी, राकेश डिमरी, कुलभूषण नैथाणी, डॉ. राकेश बलूनी, विनीता उनियाल, नीना रावत, आशा डोभाल, कांति करासी, हृषिकेश ममगाईं, चंद्रशेखर जोशी, देवेंद्र कांडपाल, डॉ. लता प्रसाद, हिमांशु अवस्थी, अनूप नैथाणी, योगेश्वर पुरोहित, हर्ष मणि व्यास, शैलेश भट्ट, चमन लाल शाह, डॉ. सुनीता बौड़ाई, आशुतोष शर्मा, उत्तम सिंह रावत, एम.एस. रावत, शांति प्रकाश, नरेंद्र रावत, गणेश उनियाल, कुसुम, मनोहर लाल, इंदू भूषण सकलानी और सुरेंद्र अमोली सहित कई लोग उपस्थित रहे।
स्टोन फ्रूट्स उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु प्रमुख मांगें
एपल और कीवी मिशन की तर्ज पर “स्टोन फ्रूट्स मिशन” योजना शुरू की जाए।
उन्नत किस्मों एवं उच्च गुणवत्ता वाली पौध खरीदने हेतु किसानों को डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जाए।
स्थानीय स्तर पर हाईटेक नर्सरी स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए।
मौसम आधारित फसल बीमा योजना में ओलावृष्टि से हुई व्यक्तिगत क्षति का आंकलन सेब और आड़ू की तर्ज पर किया जाए।
औद्यानिक विपणन परिषद को सुदृढ़ करते हुए माल्टा, कीवी, आड़ू, प्लम और खुमानी के लिए पैकेजिंग सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादित फल-सब्जियों के परिवहन के लिए रोडवेज बसों की छतों पर न्यूनतम दरों पर ढुलान व्यवस्था लागू की जाए।
पहाड़ के बाजारों में निःशुल्क विपणन केंद्र स्थापित किए जाएं।
उत्पादक क्षेत्रों में खरीद केंद्रों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

Uma Shankar Kukreti