इस वर्ष, कोरोना सक्रमण के कारण, विश्व गौरैया दिवस नहीं मनाया जा सका। लेकिन पक्षी-प्रेमी शिक्षक श्री दिनेश चन्द्र कुकरेती ने घर-घर जाकर अपने नेस्ट बॉक्स वितरण पूरा किया।

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कोटद्वार:-कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण अन्य वर्ष की भांति इस वर्ष 20 मार्च को कोटद्वार में गौरैया दिवस नहीं मनाया गया लेकिन 1997 से कोटद्वार में गौरैया का संरक्षण का कार्य करने वाले शिक्षक श्री दिनेश चंद्र कुकरेती ग्राम नंदपुर कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) द्वारा गौरैया पक्षी संरक्षण हेतु प्लाई के नेस्ट बॉक्स बनाकर निशुल्क लगाए और बांटे जाते है।
शिक्षक दिनेश चंद कुकरेती गत दो दशक से नेस्ट बॉक्स स्वयं लगाते हैं वह जगह-जगह लगाते व वह बांटते हैं । यहाँ तक कि अपने प्रदेश से बाहर भी जाकर यह कार्य करते है।


इस वर्ष उन्होंने 1600 से अधिक नेस्ट बॉक्स बनाएं जिन्हें वह जनवरी से बांट व लगा रहे हैं अब तक वह 10000 से अधिक नेस्ट बॉक्स लगा वह बांट चुके हैं वर्तमान में उनके घर में 100 से अधिक नेस्ट बॉक्स कई वर्षों से लगे हैं जिनसे पक्षियों के हजारों बच्चे जन्म लेकर बड़े होकर उड़ चुके हैं बच्चो व अंडों की सुरक्षा हेतु नेस्ट बॉक्स के आगे जाला की ब्यवस्था कर और सुरक्षा मजबूत कर दी है श्री दिनेश चंद्र कुकरेती के घर वर्षभर पक्षी प्रेमी गोरेया संरक्षण का कार्य देखने हेतु आते हैं और विभिन्न जानकारियां हासिल करते हैं कुछ पक्षी प्रेमी फोन द्वारा भी उनसे संपर्क कर पक्षी संरक्षण की जानकारी व नेक्स्ट बॉक्स प्राप्त करते हैं श्री दिनेश चंद कुकरेती कई जगहों में जाकर लोगों को पक्षी संरक्षण की जानकारी देते आ रहे।
साथ ही कही घायल व असहाय पक्षियों के बारे में सूचना मिलने पर उस जगह पर जाकर घायल पक्षी का उपचार कर उन्हें बचाने का कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2014 -2015 मैं उनके द्वारा गिद्धों के झुंड को विषैले मृत मवेशियों को खाने से रोककर कई गिद्धों को मौत के मुंह से बचा चुके हैं ।उनके अनुसार हम अपने घर में नेस्ट बॉक्स लगाकर उल्लू ,तोता, मैना, हुद हुद, इंडियन रोबिन मैगपाईन रोबिन का संरक्षण कर सकते हैं वह घर में विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे झाड़ियां बेल लगाकर बुलबुल, टेलर बर्ड, बेबर बर्ड ,सनबर्ड ,डव,बबूना, जंगल बबलर का संरक्षण कर सकते हैं नेस्ट बॉक्स को ऐसी जगह लगाएं जहां बंदर और गिलहरी न पहुंच सके

 

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