ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम: अमेरिकी स्पेस कंपनियों से मैक्रों के समिट से दूरी बनाने को कहा, 120 देशों की होगी भागीदारी
पेरिस में 9-10 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट, चीन की मौजूदगी पर भी अमेरिका को आपत्ति; SpaceX समेत कई कंपनियां असमंजस में
वॉशिंगटन/पेरिस। अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक तनाव का असर अब अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी स्पेस कंपनियों से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा पेरिस में आयोजित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सम्मेलन से दूरी बनाने को कहा है।
POLITICO की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी (OSTP) के एक अधिकारी ने गुरुवार को अमेरिकी अंतरिक्ष उद्योग की कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निजी बातचीत की। इस बातचीत में SpaceX, Stoke Space, K2 Space और Astra जैसी कंपनियां शामिल थीं।
अमेरिकी अधिकारी ने कंपनियों को बताया कि सम्मेलन में भागीदारी को यूरोपीय संघ की कुछ नीतिगत स्थितियों के प्रति मौन समर्थन के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, कंपनियों को सम्मेलन में जाने से औपचारिक रूप से नहीं रोका गया और अंतिम निर्णय उन पर ही छोड़ा गया।
फ्रांस पर अमेरिका के गंभीर आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने आरोप लगाया कि फ्रांस ने इस सम्मेलन के आयोजन को लेकर अमेरिका के साथ पर्याप्त समन्वय नहीं किया। अधिकारी ने फ्रांस पर “प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं” का आरोप भी लगाया।
अमेरिकी पक्ष की यह भी शिकायत थी कि सम्मेलन के कुछ पैनल इस तरह तैयार किए गए हैं कि उनमें अमेरिकी दृष्टिकोण को पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी। इससे अमेरिकी अंतरिक्ष उद्योग के प्रयासों और हितों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई।
इसके अलावा सम्मेलन में चीन की भागीदारी को लेकर भी ट्रंप प्रशासन ने चिंता जाहिर की है।
SpaceX समेत कंपनियां असमंजस में
बैठक के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनियों के अधिकारियों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि उन्हें सम्मेलन में शामिल होना चाहिए या नहीं। रिपोर्ट में एक उद्योग प्रतिनिधि के हवाले से कहा गया कि यूरोप अमेरिकी स्पेस कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बाजार है, लेकिन अमेरिका की तुलना में कम महत्वपूर्ण है।
इसके चलते कंपनियां अब यह तय करने की कोशिश कर रही हैं कि सम्मेलन से दूरी कैसे बनाई जाए, ताकि यूरोपीय बाजार में उनके कारोबारी हित प्रभावित न हों।
दिलचस्प बात: अमेरिकी सरकारी अधिकारी फिर भी जाएंगे
ट्रंप प्रशासन की आपत्तियों के बावजूद अमेरिका पूरी तरह इस सम्मेलन से दूर नहीं हो रहा है। OSTP, अमेरिकी विदेश विभाग, वाणिज्य विभाग और NASA के अधिकारी सम्मेलन में शामिल होने की योजना में हैं।
OSTP के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अंतरिक्ष क्षेत्र में अपने सहयोगियों और साझेदार देशों के साथ लगातार सहयोग कर रहा है। उनके मुताबिक, सम्मेलन में विज्ञान मिशनों, अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रमों और अंतरिक्ष सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की उम्मीद है।
9-10 सितंबर को पेरिस में जुटेंगे 120 से ज्यादा देश
मैक्रों का अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट 9 और 10 सितंबर को पेरिस के Grand Palais में आयोजित होगा। इसमें 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के साथ अंतरिक्ष एजेंसियों, कंपनियों, वैज्ञानिकों और सैन्य अधिकारियों के शामिल होने की उम्मीद है।
सम्मेलन का उद्देश्य अंतरिक्ष के भविष्य को लेकर उच्चस्तरीय रणनीतिक चर्चा, नए ऐलान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के रास्ते तलाशना है।
यूरोप बना रहा है अपनी स्वतंत्र अंतरिक्ष ताकत
इस विवाद की एक बड़ी वजह यूरोप की अपनी अंतरिक्ष क्षमता विकसित करने की कोशिश भी मानी जा रही है। यूरोपीय देश अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करके स्वतंत्र और संप्रभु स्पेस क्षमता विकसित करना चाहते हैं।
फ्रांस ने नवंबर में अपनी नई अंतरिक्ष रणनीति पेश की थी। इसके तहत 2026 से 2030 के बीच सैन्य अंतरिक्ष क्षेत्र में 4.2 अरब यूरो की अतिरिक्त राशि खर्च करने की योजना है। इससे फ्रांस का कुल सैन्य अंतरिक्ष खर्च इस अवधि में 10.2 अरब यूरो तक पहुंच जाएगा।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी सम्मेलन में महत्वपूर्ण भाषण देंगी।
ऐसे में पेरिस का यह सम्मेलन सिर्फ अंतरिक्ष सहयोग का मंच नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोप के बीच बदलते रणनीतिक समीकरण तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में भविष्य की शक्ति-संतुलन की दिशा का संकेत देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन भी बन गया है।
