देहरादून

आधुनिक तकनीक से महिला सशक्तिकरण पर यूसैक में कार्यशाला, RS/GIS, AI व ड्रोन तकनीक से आत्मनिर्भरता पर जोर

 

देहरादून, 07 फरवरी 2026। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के सभागार में शनिवार को “आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं को RS/GIS, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक जैसी उभरती तकनीकों से जोड़कर उन्हें शैक्षणिक, व्यावसायिक और सामाजिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना रहा।


कार्यक्रम का शुभारंभ महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान की पूर्व निदेशक डॉ. मीरा तिवारी, शिक्षाविद प्रो. रीमा पंत, वैज्ञानिक डॉ. पूनम गुप्ता एवं यूसैक के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण रानी ने स्वागत संबोधन देते हुए RS/GIS, AI और ड्रोन तकनीक के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया।


इस अवसर पर प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजगार, नवाचार, कौशल विकास और नेतृत्व के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सूचना एवं संचार तकनीक, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने महिलाओं को नई पहचान और आत्मनिर्भरता प्रदान की है। AI आधारित प्लेटफॉर्म, मोबाइल हेल्थ ऐप, टेलीमेडिसिन और सेफ्टी ऐप्स महिलाओं के जीवन को सुरक्षित और सशक्त बना रहे हैं।
मुख्य अतिथि महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को निर्णय निर्माण, नेतृत्व और शासन के हर स्तर पर समान अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं और राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और महिला-बाल सुरक्षा जैसे मुद्दों को नीति-निर्माण में प्राथमिकता मिल रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल मंच महिलाओं के अधिकारों और उपलब्धियों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं।
अतिविशिष्ट अतिथि फिल्म अभिनेता दिलीप ताहिल ने कहा कि तकनीकी विकास ने फिल्म जगत में भी महिलाओं को नई पहचान दी है। डिजिटल कैमरा, एडिटिंग सॉफ्टवेयर, वीएफएक्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म ने महिलाओं को निर्देशक, लेखक, सिनेमैटोग्राफर और निर्माता के रूप में नए अवसर प्रदान किए हैं, जिससे वे अपनी कहानियां स्वयं प्रस्तुत कर रही हैं।
वैज्ञानिक डॉ. पूनम गुप्ता ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल क्लासरूम ने दूर-दराज क्षेत्रों की महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच आसान बना दी है। वहीं शिक्षाविद प्रो. रीमा पंत ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म महिलाओं को अपनी आवाज उठाने, नेटवर्क बनाने और नेतृत्व में आगे बढ़ने का अवसर दे रहे हैं, जिससे वे नीति-निर्माण और सामाजिक बदलाव में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
कार्यशाला में डीएवी पीजी कॉलेज की एनसीसी छात्राएं, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून की छात्राएं, यूसैक के वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. नीलम रावत द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

Uma Shankar Kukreti