दून विश्वविद्यालय में “अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस” पर विशेष कार्यक्रम
वृद्धजनों को परिवार से अपनापन और प्रासंगिकता का एहसास मिलना जरूरी – प्रो. सुरेखा डंगवाल
विकसित भारत की संकल्पना में वरिष्ठ नागरिकों का भी होगा महत्वपूर्ण योगदान- प्रो. सुरेखा डंगवाल
देहरादून, 1 अक्टूबर 2025।
हेल्पएज इंडिया और दून विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के क्लब “सारथि” के सहयोग से “अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस” के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस वर्ष का विषय था “AdvantAge 60”, जिसका उद्देश्य वृद्धजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके सामने आने वाली चुनौतियों—एकाकीपन, गरीबी और उपेक्षा—के खिलाफ जागरूकता फैलाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मश्री सम्मान से अलंकृत बसंती बिष्ट, मैती मूवमेंट के संस्थापक एवं पद्मश्री श्री कल्याण सिंह रावत, देश की पहली महिला संगीतकार एवं पद्मश्री माधुरी बर्थवाल, ऑल इंडिया सीनियर सिटिजन कंसिडरेशन के अध्यक्ष श्री एम. के. रैना पैनल एवं दून विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ राजेश भट्ट डिस्कशन के लिए उपस्थित रहे।
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने अपने संबोधन में कहा कि “आज के दौर में यह बेहद आवश्यक है कि हमारे परिवारों में बुजुर्ग स्वयं को असहाय न महसूस करें, बल्कि वे यह महसूस करें कि वे प्रासंगिक, महत्वपूर्ण और आवश्यक हैं। उन्हें केवल देखभाल की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपनापन, सम्मान और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी की भी जरूरत है। यदि समाज वास्तव में प्रगतिशील बनना चाहता है तो इसमें बुजुर्गों की सक्रिय भूमिका को सुनिश्चित करना ही होगा।” उन्होंने कहा कि वृद्धजनों के अनुभवों और ज्ञान को “खजाना” मानते हुए उसे अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता है, ताकि विकसित भारत की संकल्पना में वरिष्ठ नागरिक भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके।
पद्मश्री सम्मान से अलंकृत बसंती बिष्ट ने यह कहा कि वृद्धजनों का अनुभव और ज्ञान नई पीढ़ी के लिए दिशा-निर्देशक है। यदि परिवार और समाज इसे समझकर आगे बढ़े, तो पीढ़ियों के बीच विश्वास और सहयोग और भी मजबूत हो सकता है।
पद्मश्री श्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि “वरिष्ठ नागरिक केवल अनुभव के भंडार नहीं हैं, बल्कि वे समाज की धुरी हैं। हमें उन्हें अलग-थलग नहीं, बल्कि सक्रिय और सशक्त नागरिक के रूप में देखना चाहिए। युवा पीढ़ी को भी यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि वे अपने दादा-दादी और माता-पिता को सम्मान और सहारा दें।”
पद्मश्री माधुरी बर्थवाल ने “AdvantAge 60” विषय के अंतर्गत यह संदेश दिया गया कि वृद्धावस्था को अवनति नहीं बल्कि अवसर और उद्देश्य से जोड़ा जाना चाहिए।
एम. के. रैना ने बताया कि नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन के बीच अब भी बड़ा अंतर है । बदलते सामाजिक और पारिवारिक ढांचे पर चर्चा हुई और यह स्वीकार किया गया कि बुजुर्गों और बच्चों के बीच संवाद और समझ आवश्यक है।
मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश भट्ट ने वृद्धावस्था से जुड़े मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने वृद्धजन उत्पीड़न, साइबर अपराध और जलवायु परिवर्तन जैसी उभरती समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए समाधान के रूप में ध्यान (Meditation), स्वस्थ जीवनशैली, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक समर्थन की आवश्यकता बताई।
यह आयोजन न केवल एक शैक्षणिक गतिविधि था, बल्कि वृद्धजनों के सम्मान और समाज में उनकी भूमिका को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। दून विश्वविद्यालय और हेल्पएज इंडिया के इस संयुक्त प्रयास ने प्रतिभागियों को यह संदेश दिया कि वृद्धावस्था एक बोझ नहीं, बल्कि जीवन का सबसे मूल्यवान चरण है, जिसे गरिमा, उद्देश्य और योगदान के साथ जिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन चैतन्य उपाध्याय ने किया, जो हेल्पएज इंडिया के उत्तराखंड राज्य प्रमुख भी हैं। उन्होंने संस्था द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने AIIMS सहित विभिन्न स्थानों पर स्थापित वरिष्ठ नागरिक सेल, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संचालित योजनाओं और वरिष्ठ नागरिकों को मुख्यधारा में जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख किया। हेल्पएज इंडिया से शकृष्ण अवतार, दून विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर आर. पी. ममगाईं सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
