कोटद्वार

वृद्ध मां के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा नरेंद्र को ढूंढने पानीपत पहुंचे पूर्व सैनिक

 

कोटद्वार की रहने वाली एक वृद्ध महिला के इकलौते पुत्र नरेंद्र की गुमशुदगी ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। बीते 12 दिनों से लापता नरेंद्र की तलाश में उसकी मां अब अपने आंसुओं और उम्मीदों के साथ हर दरवाज़ा खटखटा रही हैं।

अपने बेटे की खोज के लिए वह पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार के सदस्यों के साथ पानीपत पहुंची हैं—वही स्थान, जहां से नरेंद्र अंतिम बार लापता हुआ था।

मां की आंखों में दर्द साफ झलक रहा है। उनका कहना है कि नरेंद्र ही उनके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा है और उसके बिना उनका जीवन अधूरा है। बेटे की सकुशल वापसी के लिए वह लगातार ईश्वर से प्रार्थना कर रही हैं।

बताया गया कि नरेंद्र की मां ने सहायता की गुहार पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार से लगाई थी। मानवता और सामाजिक दायित्व को समझते हुए समिति ने तुरंत कदम बढ़ाया। समिति की चार सदस्यीय टीम—ठाकुर सिंह गुसाईं, जीत सिंह भंडारी, गोपाल सिंह सहित अन्य—विस्तृत जानकारी जुटाने और खोजबीन के लिए पानीपत पहुंची है।

पूर्व सैनिकों की यह टीम पानीपत पुलिस से संपर्क कर नरेंद्र को हर संभव ढूंढने के प्रयास में जुट गई है। समिति के सदस्यों का कहना है कि वे तब तक प्रयास जारी रखेंगे, जब तक नरेंद्र का कोई सुराग नहीं मिल जाता।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर समाज के सामने मानवीय संवेदनाओं और पूर्व सैनिकों की सामाजिक प्रतिबद्धता की मिसाल पेश की है।

 


— महेंद्र पाल सिंह रावत
अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संघर्ष समिति कोटद्वार

Uma Shankar Kukreti