हर वर्ष 31 जनवरी को आयोजित होगा ‘सनेह बर्ड फेस्टिवल’, कोटद्वार को मिलेगा नई पहचान
कोटद्वार | 07 फरवरी 2026
कोटद्वार में आयोजित सनेह बर्ड फेस्टिवल को स्थायी वार्षिक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने मंच से मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष प्रस्ताव रखा कि इस फेस्टिवल का आयोजन प्रतिवर्ष 31 जनवरी को नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि यह एक स्थायी वार्षिक उत्सव के रूप में विकसित हो सके।
उन्होंने सुझाव दिया कि सनेह बर्ड फेस्टिवल को राज्य सरकार के वन विभाग और पर्यटन विभाग के आधिकारिक वार्षिक कैलेंडर में शामिल किया जाए। इससे देश-विदेश के पक्षी प्रेमियों, प्रकृति शोधकर्ताओं और पर्यटकों को पूर्व नियोजन का अवसर मिलेगा और कोटद्वार को एक प्रमुख बर्ड टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने जानकारी दी कि इस विषय में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के निदेशक साकेत बडोला और प्रभागीय वनाधिकारी कोटद्वार जीवन मोहन दगारे के साथ सकारात्मक चर्चा हुई है। बैठक में फेस्टिवल को और अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित और आकर्षक बनाने को लेकर कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी।
निर्णय लिया गया कि सनेह बर्ड फेस्टिवल के लिए एक समर्पित आधिकारिक वेबसाइट, कार्यक्रम का लोगो, पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों की सुविधा हेतु वॉच टावर, दूरबीन, सूचना पटल तथा अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही, इस आयोजन के प्रचार-प्रसार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रस्तावों पर शीघ्र विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर अमल में लाया जाए, जिससे आगामी वर्षों में यह उत्सव और अधिक भव्य और संगठित रूप में आयोजित हो सके।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार, वन विभाग और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयासों से सनेह बर्ड फेस्टिवल को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। इससे पक्षी प्रेमियों, पर्यावरणविदों और पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे तथा पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जन-जागरूकता को मजबूती मिलेगी।
श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने विश्वास जताया कि भविष्य में प्रत्येक वर्ष 31 जनवरी को कोटद्वार में सनेह बर्ड फेस्टिवल भव्य स्तर पर आयोजित होगा और यह उत्सव उत्तराखंड की प्रमुख पर्यावरणीय एवं पर्यटन गतिविधियों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा।
