उत्तराखंड राजनीति में उभरता आक्रामक चेहरा: सूर्यकांत धस्माना
यह विशेष रिपोर्ट विभिन्न विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोतों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से प्राप्त तथ्यों के व्यापक विश्लेषण पर आधारित है।
देहरादून
उत्तराखंड की राजनीति में सूर्यकांत धस्माना एक ऐसे नेता के रूप में उभर रहे हैं, जो संगठन और सड़क—दोनों स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में वे उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष (प्रशासन एवं संगठन) हैं।
संगठन में अहम जिम्मेदारी
मार्च 2025 में प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी। उनका मुख्य फोकस पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करना और संगठन को सक्रिय रखना है।

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक
सूर्यकांत धस्माना का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा है।
वर्ष 1988 में वे उत्तराखंड के सबसे बड़े महाविद्यालय डी ए वी (पीजी) कॉलेज देहरादून के छात्र संघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए

वे स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा के शिष्य रहे
साथ ही देश के कद्दावर नेताओं जैसे मुलायम सिंह यादव और शरद पवार के साथ काम करने का अनुभव भी रखते हैं
यह अनुभव उनकी राजनीतिक समझ और नेटवर्क को मजबूत बनाता है।
राज्य निर्माण में अहम भूमिका
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौर में सूर्यकांत धस्माना की भूमिका केवल एक कार्यकर्ता तक सीमित नहीं रही, बल्कि नीति निर्माण स्तर पर भी रही।
उत्तराखंड राज्य निर्माण की पहली विस्तृत रिपोर्ट विनोद बड़थ्वाल समिति द्वारा तैयार की गई थी
इस महत्वपूर्ण समिति की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष स्वयं सूर्यकांत धस्माना थे
इस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने
उत्तराखंड के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में विश्वनाथ आनंद की नियुक्ति की
और लगभग 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया
यह भूमिका धस्माना को केवल राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि नीति-निर्माण से जुड़े अहम चेहरे के रूप में भी स्थापित करती है।
सरकार पर आक्रामक रुख
धस्माना अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं।
देहरादून गोलीकांड के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताया और सरकार पर तीखा हमला किया।
वे लगातार इन मुद्दों पर मुखर रहते हैं:
महिला सुरक्षा
भर्ती घोटाले
सांप्रदायिकता
चुनावी रणनीति
आगामी चुनावों को लेकर वे पूरी तरह सक्रिय हैं।
गांव-गांव अभियान
युवाओं को जोड़ना
संगठन को मजबूत करना
राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक क्षमता
वर्ष 2003 में, जब सूर्यकांत धस्माना राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रदेश अध्यक्ष थे, तब उन्होंने तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार के समक्ष प्रभावी पैरवी करते हुए उत्तराखंड के गोरखा समुदाय को ओबीसी का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उनकी राजनीतिक पकड़ और प्रभाव का बड़ा उदाहरण माना जाता है।
इसके बाद वर्ष 2006 में, प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ही उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन देहरादून में सफलतापूर्वक आयोजित कराया, जिसने उनकी मजबूत संगठनात्मक क्षमता और नेतृत्व कौशल को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया।
देहरादून कैंट में पकड़
धस्माना लगातार क्षेत्रीय मुद्दों पर सक्रिय हैं:
सड़क और जलभराव
बिजली-पानी की समस्या
जनसंवाद और स्वच्छता अभियान
विवाद और चुनौतियां
1994 के रामपुर तिराहा कांड से जुड़े मामले में CBI की अपील लंबित है।
निष्कर्ष
सूर्यकांत धस्माना की राजनीति केवल विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य निर्माण से लेकर वर्तमान संगठनात्मक राजनीति तक उनकी भूमिका दिखाई देती है।
यही कारण है कि वे उत्तराखंड की राजनीति में एक अनुभवी और आक्रामक नेता के रूप में उभर रहे हैं।
