देहरादून

उत्तराखंड में पत्रकार मान्यता पर सख्ती, अब LIU करेगा सत्यापन

फर्जी पत्रकारों पर लगाम: DIPR ने शुरू की कड़ी जांच प्रक्रिया

देहरादून
उत्तराखंड में सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) ने पत्रकारों की मान्यता (एक्रेडिटेशन) के नवीकरण को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब राज्य और जिला मुख्यालय स्तर पर मान्यता प्राप्त पत्रकारों का सत्यापन स्टेट इंटेलिजेंस की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) के माध्यम से किया जा रहा है।

बंशीधर तिवारी (महानिदेशक, सूचना) ने बताया कि विभाग को ऐसी शिकायतें मिली थीं कि कुछ गैर-पत्रकार भी पत्रकार मान्यता प्राप्त कर रहे हैं या इसके लिए आवेदन कर रहे हैं। इन शिकायतों के आधार पर अब सत्यापन प्रक्रिया को कड़ा किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि LIU जांच का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक और सक्रिय पत्रकारों को ही मान्यता का लाभ मिले। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर है जब वरिष्ठ पत्रकारों सहित सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों का व्यापक स्तर पर सत्यापन कराया जा रहा है।

नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु

फर्जीवाड़े पर रोक: अन्य पेशों से जुड़े लोगों द्वारा गलत तरीके से मान्यता लेने पर रोक लगेगी।
सख्त सत्यापन: राज्य और जिला स्तर के सभी पत्रकार LIU जांच के दायरे में।
रिन्यूअल पर असर: केवल सक्रिय पत्रकारों के ही कार्ड नवीनीकृत होंगे।
पारदर्शिता में वृद्धि: पूरी प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और निष्पक्ष बनाया गया है।
मान्यता के लिए जरूरी दस्तावेज
संपादक द्वारा जारी नियुक्ति पत्र व सिफारिश
पिछले एक वर्ष की प्रकाशित खबरों की कतरनें (10–15)
वेतन प्रमाण (Salary Slip/Form-16)
शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र (स्नातक/पत्रकारिता डिग्री)
अनुभव प्रमाण (राज्य स्तर: 5 वर्ष, जिला स्तर: 3 वर्ष)
LIU जांच में क्या देखा जाएगा?
क्या आवेदक फील्ड में सक्रिय पत्रकार है
क्या किसी अन्य व्यवसाय/सरकारी लाभ में संलिप्त है
क्या कोई आपराधिक रिकॉर्ड है
आवेदन प्रक्रिया
मान्यता या नवीकरण के लिए इच्छुक पत्रकार उत्तराखंड सूचना विभाग की आधिकारिक वेबसाइट
information.uk.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन के बाद उसकी हार्ड कॉपी संबंधित जिला सूचना कार्यालय या देहरादून निदेशालय में जमा करनी होगी।
इस नई व्यवस्था को उत्तराखंड में पत्रकारिता की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे वास्तविक पत्रकारों को लाभ मिलेगा और फर्जी मान्यता पर रोक लगेगी।

Uma Shankar Kukreti