दून अस्पताल में जनऔषधि घोटाले का खुलासा!
-गरीबों के नाम पर महंगी दवाओं का कारोबार.?
-30 रुपये की दवा 200 रुपये तक बेचने का खेल उजागर
जिस प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना है, उसी योजना के नाम पर दून अस्पताल में बड़ा खेल सामने आया है। औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में संचालित तीनों जनऔषधि केंद्रों से करीब 70 प्रकार की ऐसी दवाएं मिलीं, जिन पर योजना की अधिकृत मुहर या लोगो तक नहीं था।

जांच में सामने आया कि जहां जनऔषधि के तहत मिलने वाली दवाएं 30 से 50 रुपये में उपलब्ध होनी चाहिए थीं, वहीं उनकी जगह अन्य कंपनियों की जेनेरिक दवाएं 150 से 200 रुपये तक में बेची जा रही थीं। निरीक्षण में गैस, दर्द, हृदय रोग, गर्भवती महिलाओं की दवाओं के अलावा कई सिरप और ब्रांडेड उत्पाद भी मिले, जिनकी बिक्री जनऔषधि केंद्रों के नियमों के अनुरूप नहीं बताई गई।

इस खुलासे के बाद दून अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। एमएस डॉ. आरएस बिष्ट के निर्देश पर हुई जांच के बाद तीनों केंद्रों को नोटिस जारी कर दो कार्यदिवस में जवाब मांगा गया है। चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दवा बिक्री रोकने के साथ वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के नियम स्पष्ट हैं—केंद्रों पर केवल अधिकृत लोगो वाली दवाओं की ही बिक्री की जा सकती है। किसी भी गैर-अधिकृत या ब्रांडेड दवा की बिक्री नियमों का उल्लंघन मानी जाती है।
सीईओ डॉ. मनोज शर्मा ने भी साफ कहा है कि नियम तोड़ने वाले केंद्रों की अनुमति निरस्त करने और इंसेंटिव रोकने सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गरीबों के लिए बनाई गई योजना में भी महंगी दवाओं का यह खेल चल रहा था, तो आखिर इसकी कीमत कौन चुका रहा था? जवाब सिर्फ प्रशासन को नहीं, पूरे सिस्टम को देना होगा।
