देहरादून

भाषा की मर्यादा भूले कांग्रेसी, जनता के जनादेश का अपमान बर्दाश्त नहीं: मनोज गौनियाल

देहरादून: राजनीति में वैचारिक मतभेद होना लोकतंत्र की एक खूबसूरत विशेषता है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि राजनेता भाषा की मर्यादा ही भूल जाएं। देश के प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करना न केवल पद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि यह जनता के जनादेश और पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी मनोज गौनियाल ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कही।
मनोज गौनियाल ने कांग्रेस के शीर्ष और वरिष्ठ नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए सीधा सवाल दागा है। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस के लिए राजनीतिक विरोध का मतलब अब पूरी तरह से शब्दों की शालीनता और मर्यादा को खत्म कर देना रह गया है?
भाजपा नेता ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र में आपको सरकार की नीतियों, फैसलों और विचारों का विरोध करने का पूरा अधिकार है, और आपको वह पुरजोर तरीके से करना भी चाहिए। लेकिन विरोध की आड़ में देश के सर्वोच्च निर्वाचित नेतृत्व के प्रति सम्मान और शालीनता की सीमा को लांघना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दोहरे लहजे में स्पष्ट किया कि राजनीति में केवल बड़बोले बयान मायने नहीं रखते, बल्कि आपके संस्कार और व्यवहार भी जनता के बीच आपकी छवि तय करते हैं।