देहरादून

देहरादून से गैरसैण की जंग: 125 किमी का सफर पूरा, स्थाई राजधानी की मांग को लेकर पदयात्रा जारी

देहरादून/श्रीनगर, 23 अगस्त। उत्तराखंड की स्थाई राजधानी गैरसैण बनाने की मांग को लेकर देहरादून से शुरू हुई ‘स्थाई राजधानी गैरसैण समिति’ की संकल्प पदयात्रा लगातार आगे बढ़ रही है। 15 अगस्त को देहरादून स्थित अस्थाई विधानसभा से शुरू हुई यह पदयात्रा अब तक 125 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर मलेथा से श्रीनगर की ओर रवाना हो चुकी है। 275 किलोमीटर के लक्ष्य वाली इस यात्रा को अभी करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय करनी है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका संकल्प किसी भी दूरी से बड़ा है।
मलेथा में गूंजे गैरसैण के नारे, मातृशक्ति ने किया जोरदार स्वागत


मलेथा पहुंचने पर स्थानीय मातृशक्ति ने पदयात्रियों का आत्मीय और जोरदार स्वागत किया। इस दौरान महिलाओं का पहाड़ की समस्याओं को लेकर आक्रोश भी खुलकर सामने आया। क्षेत्र में “सुन ले धामी—गैरसैण, सुन ले मोदी—गैरसैण” जैसे नारे गूंजते रहे।
महिलाओं ने आंदोलनकारियों के साथ संवाद करते हुए पहाड़ की बदहाल शिक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं की कमी और बढ़ती बेरोजगारी का दर्द साझा किया। उनका कहना था कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है।
सामूहिक मुंडन कर जताया था विरोध
सरकार की कथित उपेक्षा और संवेदनहीनता के विरोध में समिति के सदस्यों ने 13 अगस्त को सामूहिक मुंडन कराकर अपना विरोध दर्ज कराया था। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम सरकार की नीतियों के खिलाफ उनके गहरे आक्रोश का प्रतीक है और अब वे गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाएंगे।
पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में बढ़ रहे कदम
उत्तराखंड शासन के पूर्व सचिव एवं पूर्व IAS अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में चल रही इस पदयात्रा में 76 वर्षीय वयोवृद्ध आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमेड़ी सहित रामेश्वर शर्मा, सुधीर गैरौला, दान सिंह मिंगवाल, नारायण सिंह बिष्ट, विनोद चौहान और दयाल सिंह राणा लगातार यात्रा कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान आंदोलनकारी गांव-गांव और कस्बों में लोगों से संवाद कर रहे हैं। समिति का दावा है कि आम जनता के बीच पहाड़ की उपेक्षा और गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
गैरसैण पहुंचकर अनिश्चितकालीन अनशन का ऐलान
स्थाई राजधानी गैरसैण समिति ने साफ किया है कि शेष दूरी तय कर गैरसैण पहुंचने के बाद आंदोलन को अनिश्चितकालीन अनशन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक गैरसैण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी घोषित नहीं किया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
“प्रण से प्राण तक—राजधानी गैरसैण” के संकल्प के साथ बढ़ते इन कदमों ने एक बार फिर उत्तराखंड की राजधानी और पहाड़ के विकास से जुड़ी बहस को सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचा दिया है।