केदारनाथ VIP बिल मामला: शासन की जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि, BKTC अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
देहरादून। केदारनाथ धाम में विशिष्ट (VIP) अतिथियों के आवास एवं भोजन के बिलों के भुगतान से जुड़े मामले में उत्तराखंड शासन की जांच में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। शासन ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के मुख्य कार्याधिकारी को जांच में चिन्हित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पर्यटन एवं धर्मस्व अनुभाग-1 के उप सचिव अनिल कुमार पाण्डेय द्वारा 25 जून 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि जांच के दौरान पाया गया कि मंदिर कोष से सक्षम स्तर की स्वीकृति के बिना अग्रिम धनराशि जारी की गई, जिसे वित्तीय अनियमितता माना गया है।
जांच रिपोर्ट में तत्कालीन व्यवस्थापक (केदारनाथ), मुख्य प्रभारी अधिकारी तथा तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। शासन ने बीकेटीसी अधिनियम, 1939 एवं संबंधित नियमावलियों के तहत आवश्यक विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मामला उस समय चर्चा में आया था जब आरटीआई के माध्यम से कुछ विशिष्ट अतिथियों के आवास एवं भोजन व्यय से जुड़े दस्तावेज सामने आए। उपलब्ध दस्तावेजों में कुछ अतिथियों के नाम पर भुगतान की प्रविष्टियां दर्ज हैं। हालांकि, संबंधित जनप्रतिनिधियों ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उन्होंने अपने निजी खर्चों का भुगतान स्वयं किया था।

शासन के निर्देश के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि बीकेटीसी जांच में चिन्हित अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करती है। इस घटनाक्रम ने मंदिर समिति में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
उत्तराखंड केसरी के लिए यह एक महत्वपूर्ण फॉलो-अप स्टोरी है, क्योंकि मामला धार्मिक संस्थान में वित्तीय जवाबदेही और सरकारी जांच से जुड़ा है।
