देहरादूनहरिद्वार

श्री स्वामी गुरु महाराज रामानुज पवन जी के मार्गदर्शन में सामाजिक एवं आध्यात्मिक उत्थान के नए आयाम

 

झांसी/हरिद्वार:

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के प्रतिष्ठित संत एवं प्रखर समाज सुधारक श्री स्वामी गुरु महाराज रामानुज पवन जी के पावन सानिध्य में समाज सेवा, आध्यात्मिक जागरण और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। स्वामी जी, जो महान दार्शनिक जगद्गुरु रामानुजाचार्य की विशिष्टाद्वैत वेदांत परंपरा के अनन्य उपासक हैं, वर्तमान में मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता के प्रचार-प्रसार में एक सेतु की भूमिका निभा रहे हैं।

सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध शंखनाद

स्वामी जी का जीवन केवल तपस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज में व्याप्त जातिगत ऊंच-नीच और भेदभाव को समाप्त करने के लिए ठोस धरातल पर कार्य किया है। उनके नेतृत्व में दलित एवं वंचित वर्गों को मंदिरों में ससम्मान प्रवेश और भक्ति के समान अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की गई है। स्वामी जी का मानना है कि ईश्वर की भक्ति पर हर मनुष्य का समान अधिकार है।

झांसी में ऐतिहासिक निर्माण: गुरु माँ कुसुम देवी की स्मृति में समाधि स्थल

वर्तमान में स्वामी जी के मार्गदर्शन में झांसी के एक दलित बहुल क्षेत्र में एक भव्य समाधि स्थल के निर्माण की योजना पर तीव्र गति से कार्य चल रहा है। यह स्थल गुरु माँ कुसुम देवी की पावन स्मृति में समर्पित होगा।

उद्देश्य: इस परियोजना का मूल उद्देश्य क्षेत्र में शिक्षा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना है।

प्रेरणा: यह पुनीत कार्य उनके परम भक्त श्री प्रहलाद कुमार अग्रवाल के विशेष अनुरोध पर प्रारंभ किया गया है, जिसे स्वामी जी ने अपनी सहर्ष स्वीकृति प्रदान की।

हरिद्वार से वैश्विक स्तर तक वैष्णव परंपरा का विस्तार

हरिद्वार के समीप हरिपुर कला स्थित आश्रम आज हिंदू धर्म और वैष्णव परंपरा के प्रचार का मुख्य केंद्र बन चुका है। स्वामी जी के इस अभियान से न केवल भारत के विभिन्न राज्य जैसे झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, और हरियाणा जुड़े हुए हैं, बल्कि विदेशों में भी उनके अनुयायी सक्रिय रूप से मानवता का संदेश फैला रहे हैं।

मानवता ही सर्वोपरि धर्म

स्वामी जी का संदेश अत्यंत सरल और प्रभावी है— “प्रेम, करुणा, सेवा और समरसता।” उनके अनुसार, जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और ज्ञान नहीं पहुँचता, तब तक आध्यात्मिक उन्नति अधूरी है। उनके ये प्रयास समाज को एक नई और सकारात्मक दिशा प्रदान कर रहे हैं।

प्रमुख संदेश:

“प्रेम, सेवा और समरसता ही सच्चा धर्म है।”

Uma Shankar Kukreti