AIImsऋषिकेश

एम्स ऋषिकेश में नवां नेशनल सिद्ध दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया

 

171 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण, सिद्ध चिकित्सा शिविर व पारंपरिक आहार प्रदर्शनी का आयोजन
“सिद्ध फॉर ग्लोबल हेल्थ” थीम पर दो दिवसीय वृहद कार्यक्रम

दिनांक : 20 जनवरी 2026
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के आयुष विभाग के तत्वावधान में नवां नेशनल सिद्ध दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित निःशुल्क सिद्ध चिकित्सा शिविर में सिद्धा पद्धति के अंतर्गत 171 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। साथ ही उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों पर आधारित पारंपरिक भोजन सामग्री की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
ऋषि अगस्तियार के जन्म नक्षत्र के उपलक्ष्य में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम की थीम “सिद्ध फॉर ग्लोबल हेल्थ” रही। कार्यक्रम के अंतर्गत सिद्ध चिकित्सा की क्लिनिकल उपयोगिता, रोगों की रोकथाम, तथा इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर में पारंपरिक फूड सिस्टम की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह, डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) सौरभ वार्ष्णेय, ऑफिशिएटिंग मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. भारत भूषण भारद्वाज तथा आयुष विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पठानिया की उपस्थिति में हुआ।
इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्साधिकारी (आयुष) डॉ. श्रीलॉय मोहंती, डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रवि कुमार, डॉ. राहुल काटकर (चिकित्साधिकारी, आयुर्वेद), डॉ. श्वेता मिश्रा (योग एवं नेचुरोपैथी), कार्यक्रम की संयोजक डॉ. पी. मिरुनालेनी (चिकित्साधिकारी, सिद्धा), तथा नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सिद्धा से असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गायत्री आर. और पोस्टग्रेजुएट स्कॉलर डॉ. वासुकी आर. उपस्थित रहे।
प्रथम दिवस की गतिविधियां
कार्यक्रम के पहले दिन आयुष विभाग में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सिद्धा, चेन्नई के सहयोग से निःशुल्क सिद्धा मेडिकल कैंप एवं सिद्धा आहार प्रदर्शनी आयोजित की गई। शिविर में विभिन्न रोगों के लिए सिद्धा परामर्श प्रदान किया गया तथा निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया।
विशेष रूप से पेट एवं आंतों के रोग, मांसपेशी-अस्थि संबंधी समस्याएं, जराचिकित्सा तथा जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के रोगियों को आवश्यक परामर्श व सावधानियों की जानकारी दी गई।
सिद्धा आहार प्रदर्शनी में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के उत्पाद जैसे पारंपरिक चावल की किस्में, बाजरा, स्थानीय सब्जियां, तथा सिद्ध डाइट के नियम प्रदर्शित किए गए। इस दौरान प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में पारंपरिक आहार की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
डॉ. पी. मिरुनालेनी ने प्रतिभागियों को प्रदर्शनी एवं इसके चिकित्सीय महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
द्वितीय दिवस की गतिविधियां
दूसरे दिन आयुष विभाग द्वारा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, एम्स ऋषिकेश (प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) स्मृति अरोड़ा) के सहयोग से बिना आग के बाजरा एवं देसी भोजन पकाने की प्रतियोगिता आयोजित की गई।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में चीफ नर्सिंग ऑफिसर डॉ. अनीता रानी तथा डॉ. ज़ेवियर बेल्सीयाल शामिल रहे। प्रतियोगिता में आयुष विभाग, नर्सिंग विभाग, पीएचडी प्रोग्राम के सदस्यों, स्टाफ और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सिद्ध न्यूट्रिशन के सिद्धांतों पर आधारित उत्तराखंड व देश के अन्य क्षेत्रों की बाजरा-आधारित एवं देसी रेसिपी प्रस्तुत कीं।
इंसेट | क्या है सिद्ध चिकित्सा पद्धति
इस अवसर पर डॉ. पी. मिरुनालेनी ने बताया कि सिद्ध चिकित्सा भारत की प्राचीनतम पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में हुई। अगस्त्यर सिद्धर को सिद्ध चिकित्सा का जनक माना जाता है।
सिद्ध चिकित्सा शरीर के तीन मूल तत्वों — वातम्, पित्तम् और कफम् — के संतुलन पर आधारित है। इसमें जड़ी-बूटियों, खनिजों एवं धातुओं से बनी औषधियां, आहार एवं जीवनशैली नियंत्रण, वर्मम चिकित्सा तथा कायाकल्पम् जैसी विधियां शामिल हैं। यह पद्धति भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है और उत्तर भारत में भी तेजी से अपनाई जा रही है।
इंसेट | प्रतियोगिता के विजेता
प्रथम पुरस्कार:
टी. रम्या – साउथ इंडियन ब्रेकफास्ट कॉम्बो (लाल चावल, पोहा, इडली, नारियल-धनिया-पुदीना चटनी, स्प्राउट्स वड़ा, मूंगफली-गुड़ के लड्डू, सूखी अदरक वाली कॉफी)
द्वितीय पुरस्कार:
कुमारी प्रियंका एवं श्री अत्रेश – भाप में पके झंगोरा व सब्जियों का सलाद (प्रोटीन-समृद्ध ड्रेसिंग के साथ)
तृतीय पुरस्कार:
श्री संदीप भंडारी एवं श्रीमती अंजना – माल्टा एवं सोयाबीन चाट
इनोवेटिव हेल्दी रेसिपी अवार्ड:
प्रणिका एवं हिमांशी – न्यूट्री बार एवं ओट्स स्मूदी
निर्णायकों ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता, पोषण संबंधी समझ और पारंपरिक फूड विजडम की सराहना की।
समापन संदेश
इस अवसर पर डॉ. पी. मिरुनालेनी, मेडिकल ऑफिसर (सिद्ध) ने कहा कि होलिस्टिक, प्रिवेंटिव एवं इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर में सिद्ध चिकित्सा, पारंपरिक आहार एवं बाजरे की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो “सिद्ध फॉर ग्लोबल हेल्थ” के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप है।

 

Uma Shankar Kukreti