जीवन लौटा तो आंखों से टपके खुशी के आंसू
गंभीर हालत में एअरलिफ्ट कर लाई गई भिकियासैण की हन्सी, एम्स की टीम ने बचाई जान और आंखों की रोशनी
ट्रॉमा व ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने की जटिल सर्जरी
दिनांक : 20 जनवरी 2026
गंभीर रूप से घायल अल्मोड़ा जनपद के भिकियासैण क्षेत्र की हन्सी सती को जब एअरलिफ्ट कर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश लाया गया, तब चिकित्सकों के समक्ष केवल उसका जीवन बचाने की ही नहीं, बल्कि दुर्घटना में आंख के भीतर घुसे कांच के टुकड़ों के कारण उसकी आंखों की रोशनी बचाने की भी बड़ी चुनौती थी। एम्स के चिकित्सकों ने टीम वर्क और उच्च स्तरीय तकनीक के माध्यम से इस चुनौती को स्वीकार किया और चरणबद्ध सर्जरी कर न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि उसके चेहरे पर मुस्कान भी लौटा दी। सफल इलाज के बाद अब हन्सी पूरी तरह स्वस्थ है और उसे एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
30 दिसंबर 2025 को अल्मोड़ा के भिकियासैण क्षेत्र में एक यात्री बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 7 यात्रियों की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल हन्सी सती पत्नी राकेश चन्द्र, निवासी सिंगोली, अल्मोड़ा को उसी दिन एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश पहुंचाया गया था।
एम्स पहुंचने पर चिकित्सकों ने पाया कि हन्सी के सिर, कंधे, पीठ और कूल्हे में गंभीर चोटें थीं। इसके साथ ही दुर्घटना के दौरान उसके हाथ की चूड़ी के कांच के कई टुकड़े बाईं आंख के भीतर ऑर्बिट में घुस गए थे, जिससे वह आंख खोल पाने में भी असमर्थ थी।
हन्सी का उपचार दो चरणों में किया गया।
पहले चरण में ट्रॉमा सर्जन डॉ. रूबी कटारिया के नेतृत्व में ट्रॉमा सर्जरी की गई।
दूसरे चरण में दंत चिकित्सा विभाग के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विशेषज्ञों द्वारा आंख के भीतर फंसे कांच के टुकड़ों को निकालने के लिए जटिल सर्जरी की गई। यह सर्जरी डॉ. प्रेम कुमार राठौर एवं उनकी टीम द्वारा सफलतापूर्वक की गई।
सफल सर्जरी और उपचार के पश्चात हन्सी अब पूर्णतः स्वस्थ है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने इसे एम्स की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए सर्जरी टीम की सराहना की। यह सर्जरी दंत चिकित्सा विभाग की प्रमुख प्रो. आशी चुग के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई। सर्जरी टीम में डॉ. प्रेम कुमार राठौर के साथ डॉ. आकांक्षा व्यास, डॉ. नाजिश खान, डॉ. रोहित लाल, डॉ. अर्पणा महाजन एवं डॉ. सिमरन शाह शामिल रहे।
दंत चिकित्सा विभाग के अंतर्गत संचालित ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के सर्जन डॉ. प्रेम कुमार राठौर ने बताया कि दुर्घटना के दौरान चूड़ी के कांच के टुकड़े घायल की बाईं आंख की ऑर्बिट में घुस गए थे। इनमें से एक टुकड़ा लगभग 2.5 सेंटीमीटर आकार का था, जो आंख के गोले (ग्लोब) और हड्डी के बीच फंसा हुआ था। समय पर सर्जरी न होने की स्थिति में आंख की रोशनी पूरी तरह जा सकती थी।
उन्होंने बताया कि यह जटिल सर्जरी 6 जनवरी 2026 को ट्रांस-कंजक्टाइवल तकनीक से की गई। इस तकनीक में आंख के भीतर से ही चीरा लगाया जाता है, जिससे आंख के बाहर कोई निशान नहीं पड़ता। ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन ऑर्बिटल वॉल सर्जरी के विशेषज्ञ होते हैं और इस प्रकार की सर्जरी इन्हीं विशेषज्ञों द्वारा की जाती है।
“ट्रॉमा सर्जन एवं ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग की टीम द्वारा किया गया यह कार्य अत्यंत सराहनीय है। एम्स ऋषिकेश में उच्च स्तरीय तकनीक आधारित ऑर्बिटल वॉल सर्जरी सहित चेहरे के विभिन्न अंगों की जटिल सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रत्येक रोगी का जीवन बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हम निरंतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
— प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश
