देहरादून

“स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, अधीनस्थ सेवा आयोग की भूमिका पर सवाल” डॉ० वी० के० बहुगुणा

 

उत्तराखंड समानता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा० वी के बहुगुणा पूर्व आईएफएस जो एक जाने माने लेखक, स्तंभकार तथा पर्यावरणविद भी हैं

देहरादून: 27/09/2025 : उत्तराखण्ड समानता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  डॉ० वी० के० बहुगुणा ने ukssc भर्ती प्रक्रिया पर  सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र द्वारा अपने सुझाव प्रेषित किया है। 

समूह ग और घ के पदों की भर्तियों का विकेंद्रीकरण और अधीनस्थ सेवा आयोगों को अनेक घोटालों और अनावश्यक केंद्रीकरण के कारण समाप्त करना।

पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड, पेपर लीक और भर्तियों में घोटालों के कारण माफियाओं के चंगुल में है। लोगों का मानना है कि समूह ग और घ के राज्य स्तरीय रिक्त पदों की भर्ती को, रोजगार विनिमय अधिनियम, 1959 के अनुसार, जिला और उप-क्षेत्रीय स्तर पर विकेंद्रीकृत करने की आवश्यकता है, जो राज्य अधीनस्थ सेवा आयोग जैसे संवैधानिक निकायों के निर्माण के कारण लगभग निष्क्रिय हो गया है। इसके कारण स्थानीय बेरोजगार युवा वंचित रह जाते हैं और बाहरी लोग उन नौकरियों पर कब्जा कर लेते हैं जो पहले स्थानीय लोगों के लिए जिला रोजगार कार्यालयों के माध्यम से उपलब्ध थीं। इन पदों के लिए विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं होती और प्रत्येक जिले में पर्याप्त संख्या में शिक्षित युवा उपलब्ध होते हैं।

2. यह देखा गया है कि उत्तराखंड में नकल माफिया और पेपर लीक घोटालों ने ऐसे संस्थानों की स्थिरता, निष्पक्षता और ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मध्य प्रदेश में व्यापमं का मामला भी इसका ज्वलंत उदाहरण है।

3. इसी प्रकार, एम्स, सर्वे ऑफ इंडिया आईसीएफआरई और भारत सरकार के अन्य कार्यालय और एम्स जैसे केंद्र सरकार के संस्थानों में भी उप-क्षेत्रीय स्तर की परीक्षाएँ आयोजित की जानी चाहिए।

4. अन्य अधीनस्थ-राजपत्रित समूह ‘ख’ पदों के लिए राज्य लोक सेवा आयोग को परीक्षा आयोजित करने के लिए अधिकृत किया जाना चाहिए।

5. इस उद्‌द्देश्य से, रोजगार कार्यालय अधिनियम, 1959 में प्रासंगिक संशोधन किए जा सकते हैं ताकि स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी और निजी दोनी क्षेत्रों में कुछ स्तरों पर नौकरियों उपलब्ध हों।

कृपया उत्तराखंड और अन्य सभी राज्यों के युवाओं के हित में इन सुझावों पर विचार करें। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा के प्रश्नपत्र की एक अभ्यर्थी द्वारा तस्करी कर उसे एक शिक्षक के माध्यम से हल करवाने के मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से देहरादून में बेरोजगार युवा धरने पर बैठे हैं और परीक्षा रद्द करने तथा पेपर लीक की सीबीआई जाँच आदि की माँग कर रहे हैं। विश्वसनीयता का एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है और सरकार को तुरंत परीक्षा की नई तिथियाँ घोषित करनी चाहिए क्योंकि कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व इस अशांति का फायदा उठा सकते हैं। अतः उपरोक्त सुझाव को स्वीकार करने के साथ-साथ राष्ट्रहित में शीघ्र कार्रवाई अपेक्षित है। इन संगठनों में जनता का विश्वास तेजी से कम हो रहा है और हमें एक ऐसी विश्वसनीय विकेन्द्रीकृत प्रणाली बनाने की आवश्यकता है जो जनता को स्वीकार्य हो।

आपके द्वारा प्रस्तुत सुझाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं से जुड़े हैं। मौजूदा हालात में जब अधीनस्थ सेवा आयोग जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता लगातार प्रश्नों के घेरे में आ रही है, तो विकेंद्रीकरण एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभरता है।

आपके बिंदुओं का सार और संभावित समाधान इस प्रकार हैं—

1. समूह ‘ग’ और ‘घ’ की भर्तियों का विकेंद्रीकरण

इन पदों के लिए विशेष तकनीकी या उच्च योग्यता की आवश्यकता नहीं होती।

इन्हें जिला स्तर और उप-क्षेत्रीय स्तर पर रोजगार विनिमय अधिनियम, 1959 के प्रावधानों के अनुसार भरा जा सकता है।

इससे स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलेगी और बाहरी तत्वों के वर्चस्व को रोका जा सकेगा।

2. पेपर लीक और नकल माफिया पर रोक

आयोग आधारित केंद्रीकृत भर्ती परीक्षाएँ बार-बार घोटालों का शिकार हुई हैं।

मध्यप्रदेश व्यापमं और उत्तराखंड पेपर लीक इसके उदाहरण हैं।

छोटे स्तर की विकेन्द्रीकृत परीक्षाएँ भ्रष्टाचार और माफियाओं के लिए कम आकर्षक होंगी।

3. केंद्र सरकार के संस्थानों में विकेंद्रीकरण

एम्स, सर्वे ऑफ इंडिया, आईसीएफआरई जैसे संस्थानों की भर्तियाँ भी उप-क्षेत्रीय स्तर पर कराई जानी चाहिए।

इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।

4. समूह ‘ख’ (राजपत्रित-अधीनस्थ) पद

इन पदों की भर्ती राज्य लोक सेवा आयोग से कराई जानी चाहिए क्योंकि इनके लिए उच्च योग्यता और प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा आवश्यक है।

5. कानूनी प्रावधान और संशोधन

रोजगार विनिमय अधिनियम, 1959 में संशोधन कर राज्य और जिला स्तर पर पदों की भर्ती सुनिश्चित की जा सकती है।

निजी क्षेत्र की नौकरियों को भी रोजगार कार्यालय से जोड़कर स्थानीय युवाओं को अवसर दिए जा सकते हैं।

6. वर्तमान परिप्रेक्ष्य (UKSSSC घोटाला)

हाल में हुए प्रश्नपत्र लीक मामले ने आयोग की विश्वसनीयता पर गहरा आघात किया है।

अभ्यर्थी आंदोलनरत हैं और सीबीआई जाँच व परीक्षा रद्द करने की माँग कर रहे हैं।

यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो यह युवाओं के विश्वास संकट को गहरा कर सकता है और असामाजिक व राष्ट्रविरोधी तत्व इसका फायदा उठा सकते हैं।

सुझाव:

सरकार को चाहिए कि तुरंत नई परीक्षा तिथियाँ घोषित करे।

पेपर लीक मामलों की सीबीआई/एसआईटी से निष्पक्ष जाँच कराए।

दीर्घकालिक समाधान के रूप में विकेंद्रीकृत भर्ती प्रणाली अपनाई जाए।

जिला रोजगार कार्यालयों की भूमिका को पुनर्जीवित किया जाए।

👉 यह केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल हो सकता है, जिससे पारदर्शिता और स्थानीय रोजगार अवसर दोनों बढ़ेंगे।

Uma Shankar Kukreti