₹1 के नोट की छपाई वित्त मंत्रालय करवाता है, आरबीआई क्यों नहीं!

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₹1 के नोट की छपाई वित्त मंत्रालय करवाता है, आरबीआई क्यों नहीं!

आपने भाजी वाले से सब्ज़ी ख़रीदी होगी.. वो टमाटर तौलता कैसे हैं ? एक तरफ़ टमाटर रखता हैं दूसरी तरफ़ बाट( वज़न)। दोनो बराबर होने चाहिये।

लेकिन अगर सब्ज़ी वाला बाट ख़ुद बनाने लगे तो ? फिर तो एक किलो टमाटर का वास्तविक वज़न सब्ज़ी वाले की मर्ज़ी से होगा। और हर किसी का अपना बाट होगा।

फिर आप अलग अलग दुकान से भी अगर १ किलो सब्ज़ी लो तो भी दोनो का भार अलग अलग हो सकता हैं।

तो इसके लियें मानक बनाये गये हैं। और मानक हैं तो मानक संस्था भी होगी जो बाट का वज़न सच में १ किलो के बराबर है या नहीं ये सत्यापित करे ।

बस तो आर॰बी॰आई॰ वो भाजी वाला हैं जो मुद्रा का उत्पादन ( तय सिद्धांतो से) करता हैं। लेकिन १०० रुपये मतलब कितना इसका मानक भारत सरकार बनाती हैं।

और ये मानक हैं १ रुपया। जैसे आर॰बी॰आई॰ के द्वारा जारी १०० रुपये का मूल्य भारत सरकार द्वारा जारी १ रुपए के मूल्य का १०० गुना होगा ।

काल्पनिक तौर पर अगर आप आर॰बी॰आई॰ के पास जाये और बोले मुझे आप पर भरोसा नहीं हैं आप आपने १०० रुपये वापिस लो और अपना वादा पूरा करते हुए मुझे १०० रुपए वापिस करों।.. तो आर॰बी॰आई॰ आपको क्या वापिस करे क्यूँकि सभी मुद्रा तो उसकी ही हैं.. इस परिस्थिति में आर॰बी॰आई॰ आपको भारत सरकार द्वारा जारी एक एक रूपए के १०० नोट देना होगा ।

एक रुपया सरकार का ऐसेट हैं, और आर॰बी॰आई॰ द्वारा जारी सभी मुद्रा भारत सरकार के लियें उधार जैसी हैं । जिसको ज़रूरत होने पर भारत सरकार अपने मानक ( १ रुपये ) सेअदा कर सकती हैं । सरकार उधार को अपने ऐसेट से चुका सकती हैं।

एक रुपया, भारत की मुद्रा का मानक हैं। इसलिये इसको भारत सरकार ही बना सकती हैं। इस मानक के आधार पर आर॰बी॰आई॰ बाक़ी मुद्रा बाज़ार में निकालती हैं।

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