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मौसम की बेरुखी के कारण इस बार विदेशी प्रवासी पक्षी कप्फू लगभग एक सप्ताह बाद तुगनाथ घाटी पहुंचा है!

ऊखीमठ  : मौसम की बेरुखी के कारण इस बार विदेशी प्रवासी पक्षी कप्फू लगभग एक सप्ताह बाद तुगनाथ घाटी पहुंचा है! वैज्ञानिक भाषा में इस पक्षी को कुकू कहा जाता है! सितम्बर माह तक कप्फू तुगनाथ घाटी की सुरम्य वादियों में विचरण कर यहाँ से फिर विदेशी प्रवास पर चले जायेगा! पूरे विश्व में नौ प्रजापतियों के कप्फू पाये जाते हैं, मगर उत्तराखण्ड में सात ही प्रजाति के कप्फू विचरण करने के लिए आते हैं। शेष दो प्रजाति के कप्फू विदेशों में ही विचरण करते हैं! कोरोना महामारी के कारण हुए लाॅक डाऊन होने से इन्हें विचरण करने में आजादी मिल रही है जिससे आजकल कप्फू पक्षी स्वत्रंत रुप से विचरण कर रहा है। कप्फू पक्षी को धान की बुवाई या फिर गढ़वाली भाषा में उष्म ऋतु का घोतक माना जाता है। धान की बुवाई करते समय कप्फू पक्षी अपने कोकलहाट से हर एक किसान को मंत्रमुग्ध कर देता है ‘ कप्फू पक्षी का आगमन उत्तराखंड में अप्रैल माह के शुभारंभ में हो जाता है मगर इस वर्ष मौसम की बेरूखी के कारण इस पक्षी का आगमन आजकल हो रहा है। उत्तराखंड के गढ़ गौरव नरेन्द्र सिंह नेगी सहित सभी लोक गायकों ने कप्फू पक्षी का गुणगान अपने गीतों में बड़े मार्मिकता से किया है! कप्फू पक्षी की पूरे विश्व में हिमालयन कुकू, लीसर कुकू, लार्ज हाक कुकू, कौमन हाक कुकू, इण्डियन कुकू, यूरेशियन कुकू, जैकोवीन कुकू सहित कुल नौ प्रजातियां पाई जाती है। कप्फू पक्षी हिमालय में कजाकिस्तान से विचरण करने के लिए आता है तथा सितम्बर माह में यहाँ से वापस चला जाता है! कप्फू पक्षी की दो जाति जसनक विंग कुकू व हौगसक हांक कुकू अरुणाचल प्रदेश में विचरण करते हैं तथा सात प्रजातियां बांज, बुरासों के जंगलों में विचरण करते हैं! तुगनाथ घाटी में पहुंचने वाला कप्फू पक्षी चन्द्र शिला तक विचरण कर सकता है, कप्फू पक्षी दूसरे पक्षियों के घोंसलों में अण्डे देता है तथा अण्डे देने के बाद फुर्र हो जाता है जिससे कप्फू के बच्चों की देखभाल वही पक्षी करता है जिस पक्षी के घौसले में कप्फू पक्षी ने अण्डे छोडे थे! कप्फू पक्षी शाकाहारी व मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन करता है, शिक्षिका सुधा सेमवाल व रीना बिष्ट कहती है कि जब ससुराल में कप्फू पक्षी की मधुर आवाज सुनाई देती थी तो मायके की बहुत याद आती थी! पक्षी प्रेमी यशपाल सिंह नेगी ने बताया कि लाॅक डाऊन के कारण कप्फू पक्षी को विचरण करने में आजादी मिली है नहीं तो जंगलों में मानवीय तथा घोड़े खच्चरों के आवागमन व चहलकदमी से इन पक्षियों के विचरण करने में बाधा उत्पन्न होती थी।उनके अनुसार कप्फू पक्षी तुंगनाथ घाटी में आजकल स्वत्रंत रुप से विचरण कर रहे हैं तथा मदमस्त हो कर निर्भीक उड़ाने भर रहे हैं। लगभग एक सप्ताह बाद तुगनाथ घाटी पहुंचा है! वैज्ञानिक भाषा में इस पक्षी को कुकू कहा जाता है! सितम्बर माह तक कप्फू तुगनाथ घाटी की सुरम्य वादियों में विचरण कर यहाँ से फिर विदेशी प्रवास पर चले जायेगा! पूरे विश्व में नौ प्रजापतियों के कप्फू पाये जाते हैं, मगर उत्तराखण्ड में सात ही प्रजाति के कप्फू विचरण करने के लिए आते हैं। शेष दो प्रजाति के कप्फू विदेशों में ही विचरण करते हैं! कोरोना महामारी के कारण हुए लाॅक डाऊन होने से इन्हें विचरण करने में आजादी मिल रही है जिससे आजकल कप्फू पक्षी स्वत्रंत रुप से विचरण कर रहा है। कप्फू पक्षी को धान की बुवाई या फिर गढ़वाली भाषा में उष्म ऋतु का घोतक माना जाता है। धान की बुवाई करते समय कप्फू पक्षी अपने कोकलहाट से हर एक किसान को मंत्रमुग्ध कर देता है ‘ कप्फू पक्षी का आगमन उत्तराखंड में अप्रैल माह के शुभारंभ में हो जाता है मगर इस वर्ष मौसम की बेरूखी के कारण इस पक्षी का आगमन आजकल हो रहा है। उत्तराखंड के गढ़ गौरव नरेन्द्र सिंह नेगी सहित सभी लोक गायकों ने कप्फू पक्षी का गुणगान अपने गीतों में बड़े मार्मिकता से किया है! कप्फू पक्षी की पूरे विश्व में हिमालयन कुकू, लीसर कुकू, लार्ज हाक कुकू, कौमन हाक कुकू, इण्डियन कुकू, यूरेशियन कुकू, जैकोवीन कुकू सहित कुल नौ प्रजातियां पाई जाती है। कप्फू पक्षी हिमालय में कजाकिस्तान से विचरण करने के लिए आता है तथा सितम्बर माह में यहाँ से वापस चला जाता है! कप्फू पक्षी की दो जाति जसनक विंग कुकू व हौगसक हांक कुकू अरुणाचल प्रदेश में विचरण करते हैं तथा सात प्रजातियां बांज, बुरासों के जंगलों में विचरण करते हैं! तुगनाथ घाटी में पहुंचने वाला कप्फू पक्षी चन्द्र शिला तक विचरण कर सकता है, कप्फू पक्षी दूसरे पक्षियों के घोंसलों में अण्डे देता है तथा अण्डे देने के बाद फुर्र हो जाता है जिससे कप्फू के बच्चों की देखभाल वही पक्षी करता है जिस पक्षी के घौसले में कप्फू पक्षी ने अण्डे छोडे थे! कप्फू पक्षी शाकाहारी व मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन करता है, शिक्षिका सुधा सेमवाल व रीना बिष्ट कहती है कि जब ससुराल में कप्फू पक्षी की मधुर आवाज सुनाई देती थी तो मायके की बहुत याद आती थी! पक्षी प्रेमी यशपाल सिंह नेगी ने बताया कि लाॅक डाऊन के कारण कप्फू पक्षी को विचरण करने में आजादी मिली है नहीं तो जंगलों में मानवीय तथा घोड़े खच्चरों के आवागमन व चहलकदमी से इन पक्षियों के विचरण करने में बाधा उत्पन्न होती थी।उनके अनुसार कप्फू पक्षी तुंगनाथ घाटी में आजकल स्वत्रंत रुप से विचरण कर रहे हैं तथा मदमस्त हो कर निर्भीक उड़ाने भर रहे हैं।

Rajnish Kukreti

About u.s kukreti uttarakhandkesari.in हमारा प्रयास देश दुनिया से ताजे समाचारों से अवगत करना एवं जन समस्याओं उनके मुद्दो , उनकी समस्याओं को सरकारों तक पहुॅचाने का माध्यम बनेगा।हम समस्त देशवासियों मे परस्पर प्रेम और सदभाव की भावना को बल पंहुचाने के लिए प्रयासरत रहेगें uttarakhandkesari उन खबरों की भर्त्सना करेगा जो समाज में मानव मानव मे भेद करते हों अथवा धार्मिक भेदभाव को बढाते हों।हमारा एक मात्र लक्ष्य वसुधैव कुटम्बकम् आर्थात समस्त विश्व एक परिवार की तरह है की भावना को बढाना है। हम लोग किसी भी प्रतिस्पर्धा में विस्वास नही रखते हम सत्यता के साथ ही खबर लाएंगे। हमारा प्रथम उद्देश्य उत्तराखंड के पलायन व विकास पर फ़ोकस रहेगा।

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