उत्तराखंड क्रांति दल का एक दिवसीय विशेष अधिवेशन सम्पन्न, सुरेंद्र कुकरेती बने नए केंद्रीय अध्यक्ष
देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल का एक दिवसीय विशेष अधिवेशन आज जिला देहरादून के कुआँवाला स्थित नंदा गार्डन में सम्पन्न हुआ। अधिवेशन में प्रदेशभर से आए संरक्षक गणों, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया।
अधिवेशन में वर्तमान केंद्रीय अध्यक्ष माननीय पूरन सिंह कठेत ने श्री सुरेंद्र कुकरेती के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका अनुमोदन श्री शक्ति शैल कपरवान ने किया। तत्पश्चात संरक्षक माननीय काशी सिंह ऐरी ने श्री कुकरेती को अगले कार्यकाल के लिए केंद्रीय अध्यक्ष घोषित किया।
काशी सिंह ऐरी ने कहा कि “राज्य आंदोलनकारी एवं मजबूत स्तंभ के रूप में सुरेंद्र कुकरेती जी उत्तराखंड क्रांति दल को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे और राज्य के शहीदों के सपनों को साकार करेंगे।”
नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती का संबोधन
कुकरेती ने कहा कि दल ने जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उस पर वे खरा उतरेंगे।
उन्होंने कहा कि “इंद्रमणि बडोनी जी के मार्गदर्शन पर चलते हुए प्रत्येक गांव की समस्याओं का अध्ययन कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। दल के सभी पदाधिकारी मिलकर उत्तराखंड क्रांति दल को सत्ता तक पहुंचाने के लिए संघर्षरत रहेंगे।”
साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि “राज्यहित में राष्ट्रीय पार्टियों को धूल चटाने के लिए एकजुट होकर काम करें।”
अधिवेशन के राजनीतिक प्रस्ताव
- उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण (चंद्रनगर) तत्काल घोषित हो।
- प्रदेश में सशक्त भू-कानून लागू किया जाए।
- प्रदेश में 1950 मूल निवास लागू किया जाए।
- 21वीं सदी की शिक्षा—प्रत्येक ब्लॉक में निःशुल्क बोर्डिंग स्कूल स्थापित हों।
- स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जाए।
- महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास की योजनाएँ लागू हों।
- 300 यूनिट बिजली आवासीय उपयोग हेतु निःशुल्क।
- किसानों को निःशुल्क सिंचाई सुविधा।
- बड़े बांधों का विरोध, बहते पानी पर छोटे बांधों का समर्थन।
- जंगली जानवरों से जान-माल के नुकसान पर ठोस उपाय।
- प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति को रोज़गार।
- सीमांत क्षेत्रों को धारचूला से यमुनोत्री तक सड़क कनेक्टिविटी।
- PPP मोड में चल रहे अस्पताल तत्काल समाप्त कर सरकारी संचालन बहाल किया जाए।
- आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर रिक्त पदों पर सीधी भर्ती व वर्तमान कर्मचारियों का नियमितीकरण।
- राज्य में बाहर से आने वालों पर ग्रीन टैक्स लागू हो।
- उद्यान विभाग को मजबूत कर सामूहिक फल पट्टियाँ विकसित हों।
- सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन और अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित।
- पर्वतीय क्षेत्रों में ऊन उद्योग को बढ़ावा।
- रिंगाल/बांस आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन।
- राज्य बनने के बाद हुए सभी बड़े घोटालों की जाँच व कार्रवाई।
- प्रदेश के मूल निवासियों को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष आरक्षण मिले।
- पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा व व्यावसायिक संस्थानों की स्थापना।
- P.Ed., योग प्रशिक्षक, फार्मेसिस्ट आदि युवाओं को शीघ्र नियुक्ति।
- नई भूमि बंदोबस्त एवं चकबंदी व्यवस्था लागू हो।
- ब्लॉक प्रमुख एवं जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्यक्ष चुनाव।
अधिवेशन में उपस्थित प्रमुख गण
संरक्षक नारायण सिंह जनतवाल, पुष्पेंद्र त्रिपाठी, शक्तिशैल कपरवान, खड़क सिंह बगड़वाल, विजय ध्यानी, जयप्रकाश, उपाध्यक्ष शांति प्रसाद, पंकज व्यास, राजेंद्र बिष्ट, रेखा मियां, प्रमिला रावत, शकुंतला रावत, गणेश कला, मनोज कंडवाल, अतुल बेंजवाल, जितेंद्र पवार, संगीता बहुगुणा, रमा चौहान, आशा शर्मा, डी.डी. शर्मा, रामपाल, शैलेश गुलेरी, सलीम अहमद, देवेंद्र चमोली, आशुतोष नेगी, अनूप बिष्ट सहित सैकड़ों पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
अधिवेशन के संयोजक बहादुर सिंह रावत एवं महानगर अध्यक्ष प्रवीण रमोला थे। मंच संचालन केंद्रीय महामंत्री किरण रावत, बृजमोहन सजवाण, विजय बोड़ाई एवं सुशील उनियाल ने किया।
