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अंगदान में धर्म और जाति बाधा नहीं, ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगों से बच सकते हैं कई जीवन : डॉ. दीपक गुप्ता

ऋषिकेश |

अंगदान की प्रक्रिया में न तो धर्म आड़े आता है और न ही जाति। ब्रेन डेड हो चुके व्यक्ति के अंगों से किसी भी धर्म व समाज के जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है। इसके लिए चिकित्सकों के साथ-साथ आम जनता को भी अंगदान के प्रति जागरूक होना होगा।
यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के सभागार में आयोजित सार्वजनिक व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान डॉ. दीपक गुप्ता, वरिष्ठ न्यूरोसर्जन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली ने कही।

🧠 कोमा और ब्रेन डेथ में अंतर समझना जरूरी

डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि कोमा की अवस्था में व्यक्ति जीवित रहता है और उसके ठीक होने की संभावना बनी रहती है, जबकि ब्रेन डेथ पूर्णतः मृत अवस्था होती है। ब्रेन डेथ से व्यक्ति कभी वापस जीवित नहीं हो सकता। ऐसे में यदि परिजन अंगदान के लिए सहमति देते हैं तो यह न केवल महापुण्य है, बल्कि इससे कई लोगों को नया जीवन भी मिल सकता है।
उन्होंने बताया कि अंगदान के मामले में भारत विश्व में 68वें स्थान पर है, जबकि हड्डियों का पहला दान करने वाले महर्षि दधीचि इसी भारत भूमि पर जन्मे थे।

🚑 हर साल लाखों मौतें, फिर भी अंगदान बेहद कम

डॉ. गुप्ता ने कहा कि देश में हर साल:
लगभग 1.5 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में
और 50 हजार से अधिक लोग धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों से जान गंवाते हैं
यदि इलाज करने वाले चिकित्सक समय रहते ब्रेन डेथ की पुष्टि कर परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित करें, तो हर वर्ष हजारों ज़िंदगियाँ बचाई जा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष हुई लगभग 5 लाख मौतों में से सिर्फ 1128 मामलों में ही अंगदान संभव हो पाया, जो चिंता का विषय है।

👩‍⚕️ मेडिकल छात्रों से जागरूकता फैलाने की अपील

कार्यक्रम में संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने मेडिकल छात्रों से आह्वान किया कि वे अंगदान के महत्व को समझें और समाज में संदेश संवाहक बनकर जन-जागरूकता फैलाएं।
उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में कॉर्निया बैंक स्थापित है, जहां नेत्रदान करने वाले दाताओं की वजह से अब तक सैकड़ों जरूरतमंदों की आंखों की रोशनी लौटाई जा चुकी है।

👥 कार्यक्रम में रहे मौजूद

कार्यक्रम में डीन एकेडेमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, ऋषिकेश के मेयर शम्भू पासवान, विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य, मेडिकल छात्र एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

 

Uma Shankar Kukreti