राजाजी–कॉर्बेट लैंडस्केप, उत्तराखंड में ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान (GLMP) की तैयारी हेतु तकनीकी सहयोग मिशन आयोजित
राजाजी–कॉर्बेट लैंडस्केप, उत्तराखंड में ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान (GLMP) की तैयारी हेतु तकनीकी सहयोग मिशन आयोजि
उत्तराखंड में जलागम प्रबंधन निदेशालय, देहरादून द्वारा संचालित ग्रीन-एजी परियोजना के अंतर्गत राजाजी–कॉर्बेट लैंडस्केप में ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान (GLMP) की तैयारी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 9–11 मार्च 2026 तक कोटद्वार में तीन दिवसीय तकनीकी सहयोग कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) के सहयोग से संचालित ग्रीन-एजी परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य परियोजना क्षेत्र में ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान (GLMP) की तैयारी और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों एवं हितधारकों के बीच तकनीकी समझ, समन्वय और सहयोग को मजबूत करना था।
कार्यशाला में कुल 45 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (SPMU), ग्रीन लैंडस्केप कार्यान्वयन इकाई (GLIU), सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRPs), तकनीकी विशेषज्ञों तथा कृषि, उद्यान, पशुपालन, ग्रामीण विकास, नाबार्ड, रेशम, लघु सिंचाई एवं REAP/ग्रामोथान जैसे विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहे। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र राष्ट्रीय परियोजना प्रबंधन इकाई (NPMU), FAO भारत, नई दिल्ली के विशेषज्ञों द्वारा संचालित किए गए।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों के परिचय एवं अनुभव साझा करने के सत्र से हुई, जिससे प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच संवाद और सहयोग का वातावरण बना। विशेषज्ञों द्वारा ग्रीन-एजी परियोजना के उद्देश्यों, कार्यान्वयन प्रक्रिया, प्रमुख गतिविधियों तथा उन प्रबंधन उपकरणों की जानकारी दी गई जो राजाजी–कॉर्बेट लैंडस्केप में सतत कृषि और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने में सहायक हैं।

यह कार्यशाला विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और अभिसरण (Convergence) को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच भी साबित हुई। इस दौरान विभागीय प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विभागों की चल रही योजनाओं, कार्यक्रमों और तकनीकी पहलों की जानकारी साझा की। साथ ही इन योजनाओं को ग्रीन लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान (GLMP) की योजना प्रक्रिया के साथ जोड़ने तथा सह-वित्तपोषण (Co-financing) के अवसरों को मजबूत करने पर भी चर्चा की गई।

इसके अतिरिक्त, इस मिशन के माध्यम से CRPs और GLIU के विशेषज्ञों की क्षमता वृद्धि पर विशेष जोर दिया गया, जिससे वे ग्रीन-एजी परियोजना के योजना उपकरणों और सहभागी दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से समझ सकें तथा लैंडस्केप स्तर पर प्रभावी योजना निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी, आपसी सीख और विभागीय सहयोग को प्रोत्साहित किया गया।
कुल मिलाकर, यह तकनीकी सहयोग मिशन जलागम प्रबंधन निदेशालय द्वारा संचालित ग्रीन-एजी परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड में सतत कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और समेकित लैंडस्केप योजना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
