देहरादूनरुद्रप्रयाग

केदारनाथ में शपथ पत्र, गंगोत्री में ‘पंचगव्य’ से प्रवेश चारधाम यात्रा 2026 से पहले गैर-हिंदू एंट्री पर बवाल

देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों के बीच गैर-हिंदुओं/गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) और गंगोत्री धाम से जुड़े संगठनों द्वारा प्रस्तावित नई व्यवस्थाओं ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है।
🔴 केदारनाथ-बदरीनाथ: शपथ पत्र की व्यवस्था
बदरी-केदार मंदिर समिति ने अपनी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा है कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश के लिए एफिडेविट (शपथ पत्र) अनिवार्य किया जाए।
इसमें श्रद्धालु को अपनी आस्था और मंदिर की परंपराओं के सम्मान का लिखित आश्वासन देना होगा।
🔴 गंगोत्री धाम: ‘पंचगव्य’ से परीक्षा
गंगोत्री धाम में इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध और एक विशेष धार्मिक प्रक्रिया लागू करने की बात कही गई है।
श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति के अनुसार:
दर्शन से पहले पंचगव्य ग्रहण करना अनिवार्य होगा
जो व्यक्ति इसे स्वीकार करेगा, उसे सनातन परंपरा में आस्था रखने वाला माना जाएगा
इसके बाद ही धाम में प्रवेश दिया जाएगा
समिति के सचिव सुरेश सेमवाल के अनुसार, यह व्यवस्था धार्मिक आस्था और परंपराओं की रक्षा के लिए लाई जा रही है।
🔴 क्या है पंचगव्य?
पंचगव्य का अर्थ है गाय से प्राप्त पांच पदार्थों का मिश्रण:
दूध
दही
घी
गोमूत्र
गोबर
इसके साथ कई जगह गंगाजल और शहद भी मिलाया जाता है। हिंदू परंपरा में इसे शुद्धिकरण और धार्मिक महत्व से जोड़ा जाता है।
🔴 “पंचगव्य ग्रहण करे तो प्रवेश”
समिति का कहना है कि:
हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध पहले से सनातन परंपरा का हिस्सा माने जाते हैं
अन्य धर्मों के लोग यदि पंचगव्य ग्रहण करते हैं, तो उन्हें भी प्रवेश दिया जा सकता है
इसे “आस्था की स्वीकृति” के रूप में देखा जाएगा
🔴 यमुनोत्री में भी फैसला लंबित
यमुनोत्री धाम में इस मुद्दे पर 24 मार्च (मां यमुना अवतरण दिवस) को अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
🔴 मौसम का असर: बर्फ और एवलॉन्च अलर्ट
इसी बीच उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हुई है:
केदारनाथ और बदरीनाथ में 3–4 फीट तक बर्फ जमी
पांच जिलों में एवलॉन्च (हिमस्खलन) का अलर्ट जारी
⚖️ क्यों बढ़ा विवाद?
धार्मिक आस्था बनाम संवैधानिक अधिकार का सवाल
क्या किसी धार्मिक स्थल में प्रवेश सीमित किया जा सकता है?
क्या यह नियम भेदभाव की श्रेणी में आएगा?
इन सवालों को लेकर प्रदेश ही नहीं, देशभर में बहस तेज हो गई है।
👉 कुल मिलाकर, चारधाम यात्रा 2026 इस बार सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा, कानून और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गई है।

Uma Shankar Kukreti