निर्णायक दौर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रोजगार, कानून और भरोसे की राजनीति से बदलती राज्य की दिशा
CM FOCUS | उत्तराखंड @26
निर्णायक दौर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
रोजगार, कानून और भरोसे की राजनीति से बदलती राज्य की दिशा
उत्तराखंड अपने 26वें वर्ष में ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ सरकार से अब नारे नहीं, नतीजे मांगे जा रहे हैं। इस निर्णायक समय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली, फैसले और प्राथमिकताएँ राज्य की राजनीति और विकास दोनों की दिशा तय करती नजर आ रही हैं।
मुख्यमंत्री धामी के सामने चुनौती सिर्फ योजनाएँ बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें पहाड़ की आखिरी बस्ती तक प्रभावी तरीके से पहुँचाने की है। बीते कुछ वर्षों में उनके नेतृत्व में सरकार ने यह संकेत दिया है कि अब शासन का फोकस “घोषणा” से आगे बढ़कर “क्रियान्वयन” पर है।
रोजगार: सीएम धामी की सबसे बड़ी परीक्षा
उत्तराखंड की सबसे बड़ी सामाजिक समस्या — बेरोजगारी और पलायन — मुख्यमंत्री की नीतियों के केंद्र में रही है।
2021 से 2025 के बीच लगभग 25 हजार सरकारी भर्तियाँ केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि युवाओं के टूटते भरोसे को जोड़ने की कोशिश मानी जा रही हैं।
सबसे अहम फैसला रहा — नकल विरोधी कानून।
इस कानून ने न सिर्फ भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सरकार अब युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है।
सरकारी नौकरी से आगे की सोच
मुख्यमंत्री धामी की नीति सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं दिखती।
सरकार का फोकस है —
MSME आधारित औद्योगिक विकास
स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग
स्वरोजगार और कौशल विकास
लक्ष्य साफ है: पहाड़ में ही रोजगार, ताकि युवा मजबूरी में मैदानों की ओर पलायन न करें।
सरकार का दावा है कि MSME सेक्टर के जरिए 2 लाख युवाओं को रोजगार देने की दिशा में काम चल रहा है।
बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर: नींव मजबूत करने की रणनीति
वित्तीय वर्ष 2025-26 का 1,01,175 करोड़ रुपये का बजट यह बताता है कि सरकार विकास की बुनियाद मजबूत करने के मूड में है।
सड़क, पुल, पेयजल, शहरी विकास और पर्यटन—ये सभी सेक्टर मुख्यमंत्री की प्राथमिकता सूची में ऊपर हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पहाड़ी राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर ही रोजगार का सबसे बड़ा उत्प्रेरक बन सकता है, और इसी सोच के साथ बजट को आकार दिया गया है।
आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक पकड़
उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदाएँ किसी भी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होती हैं।
बीते वर्षों में आपदाओं के दौरान SDRF, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की सक्रियता ने यह संकेत दिया कि सरकार प्रशासनिक तंत्र को पहले से ज्यादा चुस्त-दुरुस्त रखने की कोशिश कर रही है।
चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य और आपात सेवाओं का संचालन भी मुख्यमंत्री की माइक्रो-मैनेजमेंट शैली को दर्शाता है।
राजनीतिक संदेश भी साफ
मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली में एक बात साफ दिखती है —
तेज फैसले, कम बयानबाजी और प्रशासन पर सीधी पकड़।
उनकी राजनीति भावनात्मक मुद्दों के साथ-साथ गवर्नेंस आधारित नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करती है, जहाँ कानून, अनुशासन और विकास साथ-साथ चलते हैं।
निष्कर्ष: 26वें साल में नेतृत्व की कसौटी
उत्तराखंड के लिए 26वां साल सिर्फ एक और साल नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला दौर है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने अब असली कसौटी यह है कि—
रोजगार के वादे कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं
पलायन पर कितनी प्रभावी रोक लगती है
और पहाड़ व मैदान के बीच विकास का संतुलन कितना बन पाता है
कुल मिलाकर, धामी सरकार ने दिशा तय कर दी है।
अब सवाल सिर्फ इतना है—
रफ्तार कितनी तेज और असर कितना गहरा होगा?
