देहरादून

‘स्थायी राजधानी गैरसैंण’ की मांग को लेकर पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी का अनिश्चितकालीन आंदोलन

“राज्य बने 25 साल, पर राजधानी कहाँ?”

देहरादून, 10 अक्टूबर 2025
उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर पूर्व आईएएस अधिकारी श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी एक बार फिर निर्णायक जनआंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। राज्य गठन के लगभग 25 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी उत्तराखंड को स्थायी राजधानी नहीं मिल पाई है। इस मुद्दे को लेकर श्री रतूड़ी 12 अक्टूबर, 2025 को प्रातः 11 बजे से देहरादून के परेड ग्राउंड में अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं करती।


IAS सेवा काल में संघर्ष और निडरता

श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी उन चुनिंदा अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने सेवा के दौरान भी नीतिगत गलतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई।

  • स्थानांतरण की मार: अपने कार्यकाल में उन्होंने 50 से अधिक बार स्थानांतरण झेले — जो उनकी बेबाकी और निडरता का प्रमाण है।
  • सरकारी उपेक्षा: सेवा काल में उन्होंने राजधानी स्थायीकरण के लिए ठोस प्रस्ताव और सूचना मांगी, परन्तु सरकार ने उनकी सलाह को दरकिनार कर दिया। इस उपेक्षा ने उन्हें सेवा निवृत्ति के बाद जन आंदोलन का मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित किया।

आंदोलन की प्रमुख वजहें

  1. शहीदों के बलिदान का सम्मान:
    राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान 42 से अधिक आंदोलनकारियों ने राजधानी की मांग को लेकर अपना बलिदान दिया था। रतूड़ी का कहना है — “यह आंदोलन उन शहीदों के सपनों को साकार करने का प्रयास है।”
  2. पलायन और पहाड़ों की उपेक्षा:
    स्थायी राजधानी के अभाव में नीतियां मैदानों तक सीमित रह गई हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की कमी के कारण गांव खाली हो रहे हैं, जिससे पहाड़ों की अस्मिता संकट में है।
  3. स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति का अभियान:
    पूर्व में गठित समिति के माध्यम से रतूड़ी ने 21 सितंबर 2025 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी एक बड़ा प्रदर्शन किया था। अब यह आंदोलन देहरादून से पुनः गति पकड़ेगा।

आगामी कार्यक्रम

श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी ने घोषणा की है कि 12 अक्टूबर को देहरादून में धरने के उपरांत वह गैरसैंण की ओर मार्च निकालेंगे।
उनका कहना है —

“यह मेरी नहीं, यह उत्तराखंड के भविष्य की लड़ाई है। जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया जाता, हम रुकेंगे नहीं।”


नागरिकों से अपील

श्री रतूड़ी ने उत्तराखंड के सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और राजनैतिक दलों से अनुरोध किया है कि वे इस जनहित के आंदोलन में शामिल होकर राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने में सहयोग दें।

 

Uma Shankar Kukreti