नंदा–सुनंदा : बालिकाओं की शिक्षा रूपी पूजा से जिला प्रशासन ने किया नववर्ष का शुभारंभ बालिकाओं को सशक्त बनाना ही लक्ष्य
04 बालिकाएं बनीं नंदा–सुनंदा, 1.55 लाख से शिक्षा पुनर्जीवित
प्रोजेक्ट नंदा–सुनंदा का 11वां संस्करण; अब तक 93 बालिकाओं की शिक्षा 33.50 लाख से संजीवनी
देहरादून, 01 जनवरी 2026 (जि.सू.का.)
नववर्ष के प्रथम दिवस जिला प्रशासन देहरादून ने समाज के अंतिम छोर पर खड़ी जरूरतमंद बालिकाओं के जीवन में शिक्षा की नई ज्योति प्रज्वलित की। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रोजेक्ट नंदा–सुनंदा के अंतर्गत 04 बालिकाओं की बाधित शिक्षा को 1.55 लाख रुपये की सहायता से पुनर्जीवित किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा बालिकाओं को शिक्षा सहायता के चेक वितरित किए गए।
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित प्रोजेक्ट नंदा–सुनंदा के अब तक 11 संस्करण आयोजित हो चुके हैं, जिनके माध्यम से 33.50 लाख रुपये की सहायता से 93 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि नववर्ष की शुरुआत यदि किसी सच्ची पूजा से हो सकती है, तो वह है जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा को सहारा देना।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन का संकल्प है कि निर्धनता या प्रतिकूल परिस्थितियां किसी भी मेधावी बालिका की शिक्षा में बाधा न बनें। जिला प्रशासन स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवाचारात्मक योजनाओं के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
संघर्षों पर विजय पाती नंदा–सुनंदा बालिकाएं
नंदनी राजपूत : वर्ष 2018 में पिता के निधन के बाद तीन बहनों की जिम्मेदारी माता पर आ गई। आर्थिक तंगी के कारण 11वीं की पढ़ाई बाधित हुई, जिसे प्रशासन ने पुनर्जीवित किया।
नव्या नैनवाल : पिता के निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट टूट पड़ा। शिक्षा बोझ बन गई थी, जिसे जिला प्रशासन ने सहारा देकर पुनः शुरू कराया।
दिव्या : पिता दुर्घटना में दिव्यांग हो गए, माता-पिता की कमजोर आर्थिकी के कारण 9वीं की पढ़ाई रुक गई थी, जिसे सहायता देकर आगे बढ़ाया गया।
आकांशी धीमान : दयनीय पारिवारिक स्थिति के कारण 8वीं की पढ़ाई बाधित हुई, जिसे प्रशासन ने पुनर्जीवित किया।
इसके अतिरिक्त दून विश्वविद्यालय से स्नातक कर रही जीविका अंथवाल ने बताया कि उनके पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और आईसीयू में भर्ती हैं। आर्थिक संकट के कारण उच्च शिक्षा बाधित हो रही थी, जिसे जिला प्रशासन के सहयोग से संबल मिला।
जिलाधिकारी ने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि परिस्थितियां जीवन का हिस्सा हैं, उनसे घबराने की नहीं बल्कि साहस और संकल्प के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। प्रशासन का सहयोग तभी सार्थक होगा जब बालिकाएं लक्ष्य तय कर पूरी मेहनत से शिक्षा जारी रखेंगी और भविष्य में सक्षम होकर समाज को भी आगे बढ़ाएंगी।
कार्यक्रम में लाभार्थी बालिकाओं ने भावुक होकर सरकार, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, सीडीपीओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां तथा अभिभावक उपस्थित रहे।
