Uttarakhandदेहरादून

घोषणा पत्रों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर एस.पी. नौटियाल की अहम पहल

देहरादून। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी घोषणा पत्रों की विश्वसनीयता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामाजिक चिंतक एस.पी. नौटियाल ने शासन और निर्वाचन आयोग को महत्वपूर्ण सुझाव प्रेषित किए हैं। उन्होंने अपने सुझावों में राजनीतिक दलों और निर्वाचित विधायकों/सांसदों द्वारा किए गए वादों की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
एस.पी. नौटियाल का कहना है कि वर्तमान में संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम तथा निर्वाचन आयोग की नियमावली में ऐसा कोई ठोस प्रावधान नहीं है, जिससे चुनाव के दौरान किए गए घोषणा पत्रों, संकल्प पत्रों या दृष्टि पत्रों की नियमित समीक्षा हो सके। राजनीतिक दल चुनाव के समय जनता से कई वादे करते हैं, लेकिन उनकी पूर्ति का कोई व्यवस्थित मूल्यांकन नहीं होता। इससे मतदाता यह जानने से वंचित रह जाते हैं कि उनके क्षेत्र के विकास के लिए किए गए वादों में से कितने पूरे हुए और कितने अधूरे हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि राजनीतिक दलों द्वारा सामूहिक रूप से या निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से किए गए प्रमुख वादों को पूरा न करने की स्थिति में निर्वाचन आयोग द्वारा अर्थदंड या अन्य दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाने पर विचार होना चाहिए। साथ ही, मतदाताओं को कुछ निर्धारित शर्तों के तहत निष्क्रिय या वचनभंग करने वाले जनप्रतिनिधि को हटाने का संवैधानिक अधिकार देने की दिशा में भी पहल की जानी चाहिए।
नौटियाल ने डिजिटल पारदर्शिता को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि सभी राज्यों की सरकारें और केंद्र सरकार अपने आधिकारिक पोर्टल पर राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र, विधायकों और सांसदों द्वारा अपने क्षेत्रों के लिए किए गए व्यक्तिगत संकल्प, उनके क्रियान्वयन की प्रगति तथा पूर्ण किए गए कार्यों का विवरण सार्वजनिक करें। इससे आम जनता को अपने जनप्रतिनिधियों के कार्यों की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा और वे उन्हें विकास कार्यों के प्रति अधिक उत्तरदायी बना सकेंगे।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सांसद निधि (MPLADS) और विधायक निधि से होने वाले कार्यों, उनके वार्षिक आवंटन और प्रगति की जानकारी भी सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जनता की भागीदारी और विश्वास भी मजबूत होगा।
एस.पी. नौटियाल ने अपने पूर्व सुझावों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रत्येक विधायक से 10–10 विकास योजनाओं के प्रस्ताव मांगे गए और उन पर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए। उन्होंने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था देश के सभी राज्यों में विधायकों और सांसदों के लिए भी लागू की जानी चाहिए।
उन्होंने अपने सुझावों को लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में एक आवश्यक कदम बताते हुए शासन से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।

एस पी नौटियाल सेवानिवृत्त ज्वाइंट कमिश्नर राज्य कर विभाग उत्तराखण्ड, जो अपनी दूसरी पारी में अपने गृह राज्य उत्तराखण्ड व देश के अनुछुये पहलूओं के मुद्दे देश के नीति नियंताओं के समक्ष उठा रहे हैं

Uma Shankar Kukreti