उत्तराखंड में गणेश गोदियाल बने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, हरक और प्रीतम सिंह को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
नई दिल्ली
कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखंड में संगठनात्मक बदलाव करते हुए नई टीम को जिम्मेदारी सौंपी है। गणेश गोदियाल को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदेश की दो प्रमुख समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति को भी मंज़ूरी दे दी है।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार —
1️⃣ श्री प्रीतम सिंह — अध्यक्ष, प्रचार समिति
2️⃣ डॉ. हरक सिंह रावत — अध्यक्ष, चुनाव प्रबंधन समिति
साथ ही, निवर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा को कांग्रेस कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। पार्टी ने उनके कार्यकाल के दौरान किए गए योगदान की सराहना की है।
🗣️ राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह बदलाव कांग्रेस की “टीम रिबूट” रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पुराने और अनुभवी नेताओं को चुनावी दिशा देने की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
प्रीतम सिंह को प्रचार समिति की कमान देना बताता है कि पार्टी मैदान स्तर पर प्रचार रणनीति को और सशक्त बनाना चाहती है, वहीं डॉ. हरक सिंह रावत की संगठनात्मक पकड़ चुनावी प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकती है।
आगामी चुनाव को देखते हुए कांग्रेस का कदम
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया है. उत्तराखंड में कांग्रेस इस समय अपनी संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के प्रयास में जुटी है. गणेश गोदियाल को संगठन का सुलझा और स्वीकार्य चेहरा माना जाता है, जो गढ़वाल क्षेत्र से आते हैं और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं.
दूसरी ओर प्रीतम सिंह संगठन और जनसंपर्क में लंबा अनुभव रखने वाले नेता हैं, जिनकी पकड़ खासकर ग्रामीण इलाकों में मजबूत है,हरक सिंह रावत, जिन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं, राज्य की चुनावी राजनीति की बारीकियों को बखूबी समझते हैं.
पार्टी ने संतुलन और संदेश दोनों साधने वाली चली चाल
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने इस बार एक तीर से तीन निशाने साधने की रणनीति अपनाई है. एक ओर पार्टी ने नेतृत्व में पीढ़ीगत संतुलन बनाए रखा है तो दूसरी ओर गढ़वाल, कुमाऊं और मैदान के समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है. संगठन के भीतर लंबे समय से उठ रही गुटबाजी की चर्चाओं को इस फैसले से संतुलित संदेश देने की कोशिश की गई है.
कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल ने इन नियुक्तियों के आदेश जारी किए. साथ ही, पूर्व अध्यक्ष करण माहरा को पार्टी कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाकर सम्मानजनक भूमिका दी गई है.
राजनीतिक हलकों में इसे कांग्रेस की एक सोची-समझी चाल बताया जा रहा है. एक ओर जहां पार्टी ने संतुलन का संदेश दिया है. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को जमीन से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम भी बढ़ाया है. इस रणनीतिक फेरबदल के साथ कांग्रेस अब उत्तराखंड में नई ऊर्जा के साथ राजनीतिक मैदान में उतरने की तैयारी में है.

