अंकिता भंडारी हत्याकांड: सोशल मीडिया ट्रायल पर उठे सवाल, आरती गौड़ विवाद और CBI जांच ने पकड़ा जोर
देहरादून/ऋषिकेश:
अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह सोशल मीडिया पर चल रहा “पब्लिक ट्रायल” और उससे जुड़ा विवाद है। बिना तथ्यों की पुष्टि किए आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे न्याय प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सोशल मीडिया बना ‘अदालत’, उठे गंभीर सवाल
मामले में कई लोग बिना ठोस साक्ष्य के निष्कर्ष निकाल रहे हैं और कुछ व्यक्तियों को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का “सोशल मीडिया ट्रायल” न केवल किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
आरती गौड़ विवाद: आरोप और जवाब
आरती गौड़ का नाम इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है।
वायरल ऑडियो क्लिप और सोशल मीडिया पोस्ट्स के आधार पर उन पर आरोप लगाए गए कि वनन्तरा रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलवाकर साक्ष्य मिटाए गए।
आरती गौड़ ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक पोस्ट डाली थी, जबकि प्रशासन ने पहले ही कार्रवाई कर दी थी।
उन्होंने अपने खिलाफ कथित दुष्प्रचार को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
FIR और कानूनी कार्रवाई
आरती गौड़ ने उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के खिलाफ देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
मुख्य आरोप:
सोशल मीडिया पर चरित्र हनन
मोबाइल नंबर सार्वजनिक करना
धमकियां दिलवाना
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।।कोटद्वार अदालत ने मई 2025 में इस मामले के मुख्य आरोपियों को सजा सुनाई:
पुलकित आर्य
सौरभ भास्कर
अंकित गुप्ता
तीनों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा दी गई। हालांकि, पीड़ित परिवार अब भी फांसी की मांग पर अड़ा हुआ है।
‘VIP’ एंगल और CBI जांच
मामले में तथाकथित ‘VIP’ एंगल को लेकर विवाद जारी है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने अब इस पूरे मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है।
वायरल ऑडियो, CCTV फुटेज और चैट्स की फोरेंसिक जांच की जा रही है।
“VIP” की पहचान और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोपों की गहन जांच जारी है।
परिवार की मांग: पूरा सच सामने आए।अंकिता के माता-पिता आज भी न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।उनका कहना है कि:
असली “VIP” का खुलासा हो
साक्ष्य मिटाने वालों पर कार्रवाई हो
दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले
अपील: अफवाहों से बचें, न्याय प्रक्रिया पर भरोसा रखें।
यह मामला बेहद संवेदनशील है। ऐसे में बिना पुष्टि के किसी पर आरोप लगाना न केवल गलत है बल्कि कानूनी रूप से भी अपराध हो सकता है।
समाज को चाहिए कि संवेदनशीलता दिखाए,
अफवाहों से दूर रहे और न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार करे।
(नोट: मामला न्यायालय में विचाराधीन है, अंतिम सत्य जांच और अदालत के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।)
