पंजाब की बाढ़ त्रासदी में दिलजीत दोसांझ ने 10 गाँव गोद लिए, हमारी माटी (उत्तराखंड )के अभिनेताओं ने एक ट्वीट तक नहीं किया: कितना आश्चर्य, कितना दुख!
शीशपाल गुसाईं
पंजाब की बाढ़ त्रासदी में दिलजीत दोसांझ ने 10 गाँव गोद लिए, हमारी माटी (उत्तराखंड )के अभिनेताओं ने एक ट्वीट तक नहीं किया: कितना आश्चर्य, कितना दुख
बारिश और बाढ़ से पंजाब के हालात बेहद खराब हैं। हमारी संवेदनाएँ वहाँ के हर प्रभावित परिवार के साथ हैं। लेकिन यह भी कटु सच्चाई है कि पंजाब से पहले उत्तराखंड ने बाढ़ और भूस्खलन की विकट मार झेली थी—जिसमें अनेक गाँव, घर, खेत-खलिहान और जीवन की पूँजी हमेशा के लिए तबाह हो गई। आज भी उत्तराखंड के कई जिले उस विनाश की पीड़ा को झेल रहे हैं।
पंजाब से आने वाले वीडियो देखकर मन प्रभावित होता है। दिलजीत दोसांझ जैसे कलाकार दस-दस गाँव गोद ले रहे हैं। कोई 200 परिवारों की जिम्मेदारी ले रहा है, तो कोई राहत पहुँचाने में दिन-रात जुटा है। पंजाबी कलाकार अपनी मिट्टी से जुड़े हैं, उनकी मदद में दिखावे का भाव नहीं, बल्कि ज़मीन पर उतरकर काम करने की सच्चाई दिखती है। यही उनके लोकप्रेम की असली पहचान है।
इसके बरअक्स, उत्तराखंड ने भी देश को प्रसून जोशी जैसे संवेदनशील गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष, और अर्चना पूरन सिंह, दीपक डोबरियाल, उर्वशी रौतेला, हिमानी शिवपुरी, धिग्मांशु धूलिया ,नेहा कक्कड़, जैसे कई बड़े-बड़े फिल्मी हस्तियाँ दी हैं। लेकिन दुखद है कि अपने राज्य की इस त्रासदी पर उनके एक शब्द भी ट्विटर पर नहीं दिखे। मदद करना तो बहुत बड़ी बात है, लेकिन कम से कम अपनी मातृभूमि की पीड़ा के साथ खड़े होने का नैतिक साहस तो दिखाना चाहिए था। क्या उत्तराखंड का नाता इन हस्तियों के लिए केवल दिखावे का है? यही प्रश्न भीतर तक चुभता है।
धिक्कार तो बड़ा भारी क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी पर भी है। कहने को वे अल्मोड़ा, उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं। अपने गाँव और वहाँ के देवताओं की पूजा व नचाने का दिखावा तो खूब करते हैं, लेकिन जब उन गाँवों पर मुसीबत आती है, तब एक ट्वीट तक नहीं करते।
पंजाब का दुख हमारा भी दुख है। लेकिन उत्तराखंड का दुख हमारा अपना, गहराई से भोगा हुआ दुख है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों और जीवन की सम्पत्ति सदा के लिए खो दी, भगवान उन्हें सहने की ताकत दे। यही प्रार्थना है।
——
